भिवाड़ी में मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक से मारपीट के विरोध में कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन धरना, गिरफ्तारी तक आंदोलन जारी
खैरथल-तिजारा जिले के भिवाड़ी नगर परिषद में मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक (सीनियर मैनेजर सॉलिड वेस्ट) के साथ कथित मारपीट के मामले ने अब प्रशासनिक आंदोलन का रूप ले लिया है। नगर परिषद के अधिकारी और कर्मचारी अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक नामजद सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
आरोपियों की गिरफ्तारी तक धरना जारी रखने का ऐलान
शनिवार सुबह नगर परिषद परिसर में बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी एकत्र होकर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मुख्य मांग आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि सरकारी कार्यालयों में कार्यरत अधिकारियों के साथ इस प्रकार की घटनाएं होंगी तो कर्मचारियों के बीच असुरक्षा का माहौल बनेगा। उन्होंने कहा कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
डीएसपी और आयुक्त ने दिया कार्रवाई का भरोसा
धरना स्थल पर भिवाड़ी के पुलिस उपाधीक्षक और नगर परिषद आयुक्त कर्मचारियों से बातचीत करने पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं और संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि कानून के विरुद्ध कार्य करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और जांच के आधार पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कचरा प्रबंधन विवाद से जुड़ा है पूरा मामला
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विवाद नगर परिषद की कचरा डंपिंग व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक दिनेश कुमार मीणा व्यवस्था में सुधार का प्रयास कर रहे थे, इसी दौरान कुछ लोगों ने उनके साथ कथित मारपीट, गाली-गलौज और जातिसूचक टिप्पणी की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा बना बड़ा मुद्दा
यह मामला अब केवल एक मारपीट की घटना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि आरोपियों के खिलाफ समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो इससे सरकारी कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होगा। वहीं पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।