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गोरा बनने की चाह पड़ सकती है भारी! Fairness Cream से किडनी तक पहुंच सकता है जहर, WHO और NIH की चेतावनी

त्वचा को जल्दी गोरा बनाने का दावा करने वाली हर क्रीम सुरक्षित नहीं होती। पुणे में 30 वर्षीय युवक की किडनी की गंभीर बीमारी का मामला सामने आने के बाद स्किन-लाइटनिंग क्रीमों में मिलाए जाने वाले मरकरी (Mercury) को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना मानक जांच वाले या अवैध ब्यूटी प्रोडक्ट लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर किडनी और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) भी ऐसे उत्पादों को लेकर पहले ही चेतावनी जारी कर चुके हैं।

पुणे के युवक का मामला क्यों बना चिंता का विषय?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुणे के 30 वर्षीय युवक ने कई महीनों तक त्वचा का रंग निखारने के उद्देश्य से एक स्थानीय फेयरनेस क्रीम का उपयोग किया। कुछ समय बाद उसके पैरों में सूजन आने लगी और पेशाब में लगातार झाग दिखाई देने लगा। अस्पताल में जांच के दौरान शरीर में मरकरी की मात्रा सामान्य से कहीं अधिक पाई गई। आगे की जांच और किडनी बायोप्सी में Membranous Nephropathy नामक बीमारी की पुष्टि हुई। चिकित्सकों का मानना है कि लंबे समय तक मरकरी युक्त क्रीम का इस्तेमाल इस बीमारी की एक संभावित वजह हो सकता है।

त्वचा को गोरा दिखाने के लिए क्यों मिलाया जाता है मरकरी?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कुछ अवैध और अनरेगुलेटेड स्किन-लाइटनिंग उत्पादों में मरकरी मिलाया जाता है क्योंकि यह त्वचा में मेलानिन बनने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है। इससे त्वचा कुछ समय के लिए हल्की और चमकदार दिखाई देती है। हालांकि यह प्रभाव केवल अस्थायी होता है, जबकि मरकरी धीरे-धीरे शरीर में जमा होकर गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। यही कारण है कि कई देशों में मरकरी युक्त कॉस्मेटिक उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है और उपभोक्ताओं को ऐसे उत्पादों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

किडनी पर कैसे हमला करता है मरकरी?

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में प्रकाशित शोध के मुताबिक, मरकरी शरीर में पहुंचने के बाद सबसे अधिक असर किडनी के फिल्टर यानी ग्लोमेरुली पर डालता है। इससे किडनी की छानने की क्षमता प्रभावित होने लगती है और पेशाब के जरिए प्रोटीन बाहर निकलने लगता है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो किडनी की कार्यक्षमता तेजी से घट सकती है। कुछ मामलों में मरीज Membranous Nephropathy जैसी गंभीर बीमारी का शिकार भी हो सकता है, जिसके इलाज में लंबा समय लग सकता है।

इन संकेतों को भूलकर भी नजरअंदाज न करें

यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से स्किन-लाइटनिंग या फेयरनेस क्रीम का उपयोग कर रहा है और उसके पैरों या टखनों में सूजन रहने लगी है, पेशाब में लगातार झाग आ रहा है या पेशाब की मात्रा में बदलाव महसूस हो रहा है, तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके अलावा लगातार थकान, कमजोरी और चेहरे पर सूजन भी किडनी से जुड़ी परेशानी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय जांच कराना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

फेयरनेस क्रीम खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि केवल लाइसेंस प्राप्त और विश्वसनीय कंपनियों के स्किन केयर उत्पाद ही खरीदने चाहिए। किसी भी क्रीम पर निर्माता का नाम, सामग्री (Ingredients) और लाइसेंस संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से लिखी होनी चाहिए। बिना लेबल, बेहद सस्ती या कुछ ही दिनों में गोरा बनाने का दावा करने वाली क्रीमों से दूरी बनाना बेहतर है। ऑनलाइन या स्थानीय बाजार से खरीदे गए किसी भी अनजान उत्पाद का इस्तेमाल करने से पहले त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना भविष्य में होने वाले बड़े नुकसान से बचा सकता है।

क्या हर फेयरनेस क्रीम खतरनाक होती है?

विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि सभी फेयरनेस या स्किन-लाइटनिंग क्रीम हानिकारक नहीं होतीं। अधिकृत कंपनियों द्वारा बनाए गए उत्पाद निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करते हैं। असली खतरा उन अवैध, नकली या बिना नियमन वाले उत्पादों से है जिनमें मरकरी या अन्य जहरीले रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए किसी एक मामले के आधार पर सभी ब्यूटी प्रोडक्ट्स को गलत ठहराना उचित नहीं होगा। जागरूक उपभोक्ता बनना और प्रमाणित उत्पादों का चयन करना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।

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