‘मुस्लिम देशों को एकजुट होना चाहिए’, पाकिस्तान दौरे में ईरानी राष्ट्रपति का क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे पर जोर
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस्लामिक देशों के बीच व्यापक सुरक्षा सहयोग की वकालत करते हुए एक नए क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे की जरूरत पर जोर दिया है। पाकिस्तान दौरे के दौरान उन्होंने मुस्लिम देशों से आपसी सहयोग और एकजुटता बढ़ाने का आह्वान किया, जिससे तथाकथित ‘इस्लामिक नाटो’ की चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं।
इस्लामाबाद में पेजेशकियन ने बढ़ाया सहयोग का हाथ
पाकिस्तान की एक दिवसीय यात्रा के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि पश्चिम एशिया और फारस की खाड़ी क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा तभी संभव है, जब क्षेत्र के देश आपसी सम्मान और सहयोग के आधार पर मिलकर काम करें। उन्होंने पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर, मिस्र और तुर्किये समेत अन्य इस्लामिक देशों के साथ संवाद और साझेदारी को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके इस बयान को क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
‘मुस्लिम देशों को साझा चुनौतियों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए’
संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान पेजेशकियन ने कहा कि मुस्लिम देशों को साझा चुनौतियों और बाहरी खतरों का सामना करने के लिए एकजुट होकर काम करना चाहिए। उन्होंने नए क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे की बात करते हुए कहा कि आपसी सहयोग और विश्वास से ही विकास, स्थिरता और लोगों की भलाई सुनिश्चित की जा सकती है। हालांकि उन्होंने किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन की घोषणा नहीं की, लेकिन उनके बयान के बाद तथाकथित ‘इस्लामिक नाटो’ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पाकिस्तान को बताया भाईचारे वाला देश
ईरानी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन की शुरुआत अल्लामा इकबाल की पंक्तियों से की और पाकिस्तान को केवल पड़ोसी नहीं बल्कि भाई जैसा देश बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध काफी गहरे हैं, जिन्होंने समय के साथ दोनों देशों को और करीब लाने का काम किया है। पेजेशकियन ने यह भी कहा कि ईरान और पाकिस्तान के बीच सहयोग के नए अवसर तलाशने के लिए मौजूदा सकारात्मक माहौल का लाभ उठाया जाना चाहिए।
शहबाज शरीफ ने बताया ‘पारिवारिक मुलाकात’
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति के साथ हुई बातचीत को बेहद सकारात्मक बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध भाईचारे और विश्वास पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद और तेहरान कठिन समय में हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं और भविष्य में भी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रयास जारी रहेंगे। शहबाज के अनुसार, दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।
‘इस्लामिक नाटो’ को लेकर पहले से चल रही हैं चर्चाएं
पिछले कुछ समय से पाकिस्तान, तुर्किये, सऊदी अरब और मिस्र जैसे देशों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चाओं की खबरें सामने आती रही हैं। हालांकि अब तक किसी आधिकारिक सैन्य गठबंधन की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय राजनीति, विभिन्न देशों के रणनीतिक हित और आपसी मतभेद ऐसे किसी भी व्यापक गठबंधन के गठन को जटिल बना सकते हैं।