Food Poisoning होने पर सबसे पहले क्या करें? जानिए मेयो और क्लीवलैंड क्लिनिक के 5 जरूरी फर्स्ट ऐड उपाय
खराब या दूषित भोजन खाने के बाद होने वाली फूड पॉइजनिंग कुछ ही घंटों में शरीर को कमजोर बना सकती है। उल्टी, दस्त और पेट में मरोड़ जैसी समस्याओं के बीच सही समय पर फर्स्ट ऐड देना बेहद जरूरी होता है। मेयो क्लिनिक और क्लीवलैंड क्लिनिक की गाइडलाइन के अनुसार शुरुआती देखभाल से मरीज को तेजी से राहत मिल सकती है और गंभीर स्थिति से बचाव संभव है।
फूड पॉइजनिंग क्या है और क्यों होती है?
फूड पॉइजनिंग एक ऐसी स्थिति है, जो दूषित, बासी या बैक्टीरिया, वायरस और परजीवियों से संक्रमित भोजन या पानी के सेवन से होती है। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, यह समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। इसके लक्षण अचानक शुरू होते हैं और कई बार शरीर में पानी की कमी तथा कमजोरी जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते हैं। अधिकांश मामलों में यह बीमारी कुछ दिनों में ठीक हो जाती है, लेकिन शुरुआती देखभाल बेहद महत्वपूर्ण होती है।
सबसे पहले पेट को आराम देना जरूरी
फूड पॉइजनिंग के दौरान लगातार उल्टी और दस्त होने पर पेट पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक शुरुआती कुछ घंटों तक ठोस भोजन से परहेज करना बेहतर होता है। इससे पाचन तंत्र को आराम मिलता है और पेट की जलन व मरोड़ कम होने में मदद मिलती है। जब तक उल्टी की समस्या नियंत्रित न हो जाए, भारी या तैलीय भोजन खाने से बचना चाहिए।
डिहाइड्रेशन से बचने के लिए तरल पदार्थ लेते रहें
उल्टी और दस्त के कारण शरीर से तेजी से पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स बाहर निकल जाते हैं। मेयो क्लिनिक की सलाह के अनुसार मरीज को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी, ओआरएस घोल, नारियल पानी या साफ सूप देते रहना चाहिए। एक बार में ज्यादा पानी पीने से उल्टी दोबारा हो सकती है, इसलिए छोटे-छोटे घूंट लेकर तरल पदार्थ लेना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
उल्टी रुकने के बाद हल्का भोजन शुरू करें
जब मरीज की हालत में सुधार होने लगे और भूख महसूस हो, तब हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन देना शुरू किया जा सकता है। सादा खिचड़ी, उबले चावल, टोस्ट या केला जैसे खाद्य पदार्थ पेट पर कम दबाव डालते हैं। वहीं तली-भुनी, मसालेदार और भारी चीजों से पूरी तरह बचना चाहिए, क्योंकि ये पेट की परेशानी को दोबारा बढ़ा सकती हैं।
इन चीजों से दूरी और पर्याप्त आराम है जरूरी
फूड पॉइजनिंग के दौरान चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक, शराब, सिगरेट और दूध से बनी चीजों से कुछ समय तक दूरी बनाकर रखना चाहिए। ये पदार्थ पेट की संवेदनशीलता बढ़ा सकते हैं। साथ ही शरीर को रिकवर होने के लिए पर्याप्त आराम की आवश्यकता होती है। पर्याप्त नींद और आराम से शरीर तेजी से संक्रमण से लड़ पाता है और कमजोरी दूर करने में मदद मिलती है।
ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें
ज्यादातर मामलों में फूड पॉइजनिंग 24 से 48 घंटे में ठीक हो जाती है, लेकिन अगर लगातार उल्टी हो रही हो, मल या उल्टी में खून दिखाई दे, तीन दिन से अधिक समय तक गंभीर दस्त बने रहें, तेज बुखार (102°F या उससे अधिक) हो या पेट में असहनीय दर्द महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे लक्षण गंभीर संक्रमण या डिहाइड्रेशन का संकेत हो सकते हैं।
फूड पॉइजनिंग के सामान्य लक्षण
- पेट में दर्द या मरोड़
- जी मिचलाना और उल्टी
- दस्त की समस्या
- शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)
- कमजोरी और थकान
- हल्का या तेज बुखार