फायर एनओसी नहीं होने पर सील भवनों को राहत: तीन दिन में डी-सील होंगे परिसर, नियम तोड़ने पर 50 हजार तक जुर्माना
राज्य सरकार ने फायर सेफ्टी मानकों के उल्लंघन के कारण सील किए गए व्यावसायिक भवनों को बड़ी राहत दी है। नए निर्देशों के तहत ऐसे भवनों को निर्धारित शर्तों के साथ तीन दिन के भीतर डी-सील किया जा सकेगा। हालांकि भवन मालिकों को 30 दिनों के भीतर सभी आवश्यक फायर सेफ्टी उपकरण लगवाकर निरीक्षण कराना होगा। नियमों की अनदेखी करने या प्रतिबंध अवधि में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने पर जुर्माना और दोबारा सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।
डीएलबी ने जारी किए नए निर्देश
स्वायत्त शासन विभाग के अधीन निदेशालय ने हाल ही में एक आदेश जारी कर उन भवनों को राहत देने का निर्णय लिया है जिन्हें फायर एनओसी या आवश्यक अग्नि सुरक्षा उपकरणों की कमी के कारण सील किया गया था। पिछले कुछ महीनों में प्रदेश के विभिन्न शहरों में होटल, रेस्टोरेंट, क्लब, बार और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की गई थी। अब सरकार ने इन भवनों को नियमों के पालन के लिए सीमित समय का अवसर देने का फैसला किया है।
30 दिन में लगानी होगी पूरी फायर सेफ्टी व्यवस्था
नए प्रावधानों के अनुसार डी-सील किए गए भवनों के संचालकों को 30 दिनों के भीतर आवश्यक फायर फाइटिंग सिस्टम और सुरक्षा उपकरण स्थापित करने होंगे। इसके बाद संबंधित नगरीय निकाय की फायर सेफ्टी शाखा द्वारा निरीक्षण किया जाएगा। जांच में सभी व्यवस्थाएं संतोषजनक पाए जाने पर फायर एनओसी जारी की जाएगी। यदि निर्धारित अवधि में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित भवन के खिलाफ पुनः सीलिंग की कार्रवाई की जा सकेगी।
प्रतिबंध अवधि में नहीं होगी व्यावसायिक गतिविधि
सरकार ने स्पष्ट किया है कि डी-सील होने का अर्थ व्यावसायिक संचालन की अनुमति नहीं है। होटल, रेस्टोरेंट, क्लब, बार और अन्य संस्थानों में 30 दिन की अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं की जा सकेगी। यह समय केवल सुरक्षा मानकों को पूरा करने और आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करने के लिए दिया गया है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
उल्लंघन पर लगेगा जुर्माना और दोबारा होगी सीलिंग
आदेश के तहत यदि कोई भवन मालिक निर्धारित समय सीमा में फायर सेफ्टी उपकरण स्थापित नहीं करता या बिना अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां शुरू करता है, तो उस पर आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। साथ ही भवन को फिर से सील करने की कार्रवाई भी होगी। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
हाल की घटनाओं के बाद बढ़ी सख्ती
हाल के समय में देश के विभिन्न हिस्सों में आगजनी की घटनाओं ने फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ाई हैं। इसी के मद्देनजर कई शहरों में बड़े प्रतिष्ठानों की जांच की गई और सुरक्षा मानकों में कमी मिलने पर उन्हें सील किया गया था। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से भवन संचालकों को नियमों का पालन करने का अवसर मिलेगा, वहीं सार्वजनिक सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।