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Iran-US शांति पहल पर बोले अजीत डोभाल, कहा- उम्मीद है यह पहल कारगर साबित होगी

अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौता ज्ञापन को लेकर भारत ने सकारात्मक लेकिन सतर्क रुख अपनाया है। ब्रिक्स देशों की बैठक के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने उम्मीद जताई कि यह पहल पश्चिम एशिया में स्थिरता लाने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और वैश्विक व्यापार को गति देने में कारगर साबित हो सकती है।

ब्रिक्स बैठक में भारत ने जताया सतर्क आशावाद

ब्रिक्स देशों की बैठक के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत इस पहल को सकारात्मक दृष्टि से देख रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच बढ़ता संवाद क्षेत्रीय तनाव कम करने में मदद करेगा। डोभाल ने कहा कि किसी भी समझौते की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है और यदि यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो इसका लाभ केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया को मिलेगा।

ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम माना जा रहा समझौता

भारत का मानना है कि इस समझौते का सबसे बड़ा असर ऊर्जा क्षेत्र में देखने को मिल सकता है। पश्चिम एशिया दुनिया के प्रमुख तेल और गैस आपूर्ति क्षेत्रों में शामिल है और यहां स्थिरता आने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता कम हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर सामान्य स्थिति बहाल होने से तेल, गैस, उर्वरक और रसायन उद्योगों की सप्लाई चेन को भी मजबूती मिलेगी।

वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन को मिल सकती है राहत

डोभाल ने संकेत दिया कि यदि क्षेत्रीय तनाव कम होता है तो समुद्री व्यापार मार्ग अधिक सुरक्षित बनेंगे और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाएं घटेंगी। पिछले कुछ समय से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और माल ढुलाई लागत पर पड़ा था। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सहमति वैश्विक आर्थिक गतिविधियों को नई गति दे सकती है और बाजार में स्थिरता ला सकती है।

अमेरिका ने भी वार्ता को बताया सकारात्मक

अमेरिकी नेतृत्व की ओर से भी वार्ता को उत्साहजनक बताया गया है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत को रचनात्मक बताते हुए कहा कि समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और परमाणु निगरानी जैसे कई अहम मुद्दों पर प्रगति हुई है। वॉशिंगटन का मानना है कि बातचीत के जरिए लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

पहले भी शांति प्रयासों का समर्थन कर चुका है भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और संवाद को बढ़ावा देने की वकालत कर चुके हैं। भारत लगातार यह कहता रहा है कि क्षेत्रीय संघर्षों का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर भी पड़ता है। इसी कारण भारत शांति और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने की नीति पर जोर देता रहा है।

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