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भारत की चीनी पर बढ़ी अनिश्चितता, नेपाल के लिए अगले कुछ साल चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं

भारत में गन्ने के उत्पादन पर मौसम की मार और अल नीनो के संभावित प्रभाव के बीच चीनी निर्यात को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, यदि उत्पादन दबाव बना रहता है तो नेपाल जैसे पड़ोसी देशों को आने वाले वर्षों में भारतीय चीनी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे नेपाल की सरकार के सामने आयात और कीमतों से जुड़ी नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

भारत के फैसले से नेपाल में बढ़ी चिंता

भारत और नेपाल के बीच पहले से ही कुछ व्यापारिक और सीमा संबंधी मुद्दों को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। इसी बीच भारतीय चीनी की उपलब्धता को लेकर सामने आई रिपोर्टों ने नेपाल में चिंता बढ़ा दी है। नेपाल लंबे समय से अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा भारत से आयात करता रहा है। ऐसे में यदि भारत घरेलू मांग को प्राथमिकता देते हुए निर्यात सीमित रखता है, तो नेपाल के सामने वैकल्पिक व्यवस्था तलाशने की चुनौती खड़ी हो सकती है। इससे स्थानीय बाजार और उद्योगों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

मौसम की मार से प्रभावित हुआ गन्ना उत्पादन

विशेषज्ञों का मानना है कि बेमौसम बारिश, कम वर्षा और जलवायु से जुड़े बदलावों ने गन्ने की खेती को प्रभावित किया है। कई इलाकों में फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में गिरावट देखी गई है। उद्योग जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि गन्ने का आकार पहले की तुलना में छोटा हुआ है और किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है। उत्पादन में कमी का सीधा असर चीनी उद्योग और उससे जुड़ी नीतियों पर पड़ सकता है, जिसके चलते निर्यात को लेकर सतर्क रुख अपनाया जा रहा है।

नेपाल की जरूरत पूरी नहीं कर पा रहा घरेलू उत्पादन

नेपाल में चीनी की कुल मांग घरेलू उत्पादन से कहीं अधिक है। देश की स्थानीय मिलें पूरी जरूरत को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं, जिसके कारण उसे हर साल बड़ी मात्रा में आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। उद्योग संगठनों का मानना है कि यदि भारत से पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिलती है तो देश को दूसरे विकल्पों की तलाश करनी होगी। इससे उद्योगों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ सकता है।

ब्राजील और पाकिस्तान जैसे देशों से आयात बन सकता है विकल्प

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत से आपूर्ति कम होने की स्थिति में नेपाल ब्राजील, पाकिस्तान या अन्य उत्पादक देशों से चीनी आयात कर सकता है। हालांकि ऐसा करने पर परिवहन लागत और आयात शुल्क बढ़ने से चीनी की कीमतें अधिक हो सकती हैं। इसका असर सीधे बाजार भाव पर दिखाई देगा। उद्योग जगत का मानना है कि तीसरे देशों से आयात आर्थिक रूप से महंगा विकल्प साबित हो सकता है।

अल नीनो के कारण वैश्विक बाजार पर भी नजर

अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार अल नीनो का असर केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई देशों के कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। यदि गन्ने की पैदावार में गिरावट जारी रहती है तो एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व के आयातक देशों पर भी दबाव बढ़ सकता है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि हालात लंबे समय तक इतने गंभीर नहीं रहेंगे और उत्पादन धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट सकता है।

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