चीन-बांग्लादेश की बढ़ती नजदीकियों पर सक्रिय हुआ बीजिंग, भारतीय चिंताओं पर चीन की प्रतिक्रिया
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित चीन यात्रा और ढाका-बीजिंग की बढ़ती नजदीकियों को लेकर क्षेत्रीय राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। चीनी सरकारी मीडिया ने इस मुद्दे पर भारतीय मीडिया की आलोचना करते हुए कहा है कि चीन और बांग्लादेश के संबंध पूरी तरह द्विपक्षीय हैं और इन्हें किसी तीसरे देश के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए।
पहली विदेश यात्रा के फैसले से बढ़ी कूटनीतिक चर्चा
फरवरी में पदभार संभालने के बाद बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान अपनी पहली विदेश यात्रा की तैयारी में हैं। रिपोर्टों के अनुसार, वह पहले मलेशिया और उसके बाद चीन का दौरा कर सकते हैं। अतीत में बांग्लादेश के प्रधानमंत्रियों द्वारा पहले भारत जाने की परंपरा रही है, लेकिन इस बार अलग प्राथमिकताओं को लेकर राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कई विश्लेषक इसे बांग्लादेश की बदलती विदेश नीति के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
भारतीय प्रतिक्रियाओं पर चीन की सरकारी मीडिया का जवाब
चीनी सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने इस मुद्दे पर भारतीय मीडिया और कुछ रणनीतिक विशेषज्ञों की टिप्पणियों की आलोचना की है। अखबार में प्रकाशित टिप्पणियों के अनुसार, चीन का मानना है कि बीजिंग और ढाका के बीच सहयोग को किसी प्रतिस्पर्धा या टकराव के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। चीनी विशेषज्ञों का दावा है कि भारत को क्षेत्रीय घटनाक्रमों को केवल सुरक्षा खतरे के दृष्टिकोण से नहीं आंकना चाहिए।
चीन और बांग्लादेश के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी
चीन और बांग्लादेश के बीच पिछले कई वर्षों में आर्थिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। चीन बांग्लादेश के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है और दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का व्यापार होता है। बुनियादी ढांचा, ऊर्जा, परिवहन और औद्योगिक परियोजनाओं में चीनी निवेश ने दोनों देशों के रिश्तों को और गहरा किया है। बांग्लादेश चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) से जुड़ने वाला दक्षिण एशिया का पहला देश भी रहा है।
रक्षा क्षेत्र में भी बढ़ा है सहयोग
आर्थिक संबंधों के अलावा रक्षा क्षेत्र में भी चीन और बांग्लादेश के बीच सहयोग महत्वपूर्ण माना जाता है। बांग्लादेश लंबे समय से चीन से सैन्य उपकरणों की खरीद करता रहा है। इसमें नौसेना, थल सेना और वायुसेना से जुड़े कई उपकरण शामिल हैं। रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह सहयोग दोनों देशों के बीच व्यापक सुरक्षा साझेदारी का हिस्सा है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी बनी हुई है नजर
चीनी विशेषज्ञों का कहना है कि बांग्लादेश और चीन के संबंध किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं हैं। वहीं, क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि शेख हसीना सरकार के बाद भारत और बांग्लादेश के संबंधों में कुछ चुनौतियां सामने आई हैं और दोनों देश संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। दक्षिण एशिया की बदलती भू-राजनीति के बीच चीन, भारत और बांग्लादेश के समीकरणों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।