जैसलमेर के रामदेवरा में इंजीनियरिंग का कमाल, 18 हजार स्क्वायर फीट की धर्मशाला हवा में उठाई
जैसलमेर जिले के रामदेवरा कस्बे में इंजीनियरिंग का एक अनोखा और हैरतअंगेज उदाहरण देखने को मिल रहा है। यहां 18 हजार स्क्वायर फीट क्षेत्रफल में बनी दो मंजिला नागौर धर्मशाला को बिना तोड़े-फोड़े जैक तकनीक की मदद से करीब 3 फीट तक ऊंचा उठाया जा रहा है। यह काम जिले में पहली बार किया जा रहा है और इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीकी उपलब्धि भविष्य में कई पुराने भवनों के संरक्षण में मददगार साबित हो सकती है।
जलभराव की समस्या बनी वजह
रामदेवरा स्थित नागौर धर्मशाला लंबे समय से बरसात के दौरान जलभराव की समस्या से जूझ रही थी। भवन का लेवल आसपास के क्षेत्र की तुलना में नीचे होने के कारण बारिश का पानी परिसर में भर जाता था। इससे श्रद्धालुओं और आगंतुकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। धर्मशाला को तोड़कर दोबारा बनाना महंगा और समय लेने वाला विकल्प था, इसलिए प्रबंधन ने आधुनिक तकनीक की मदद से पूरे भवन को ऊपर उठाने का निर्णय लिया।
हरियाणा से आई विशेषज्ञों की टीम
इस चुनौतीपूर्ण कार्य को पूरा करने के लिए हरियाणा से इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई। इंजीनियर प्रवीण कुमार के नेतृत्व में करीब 80 श्रमिक और विशेषज्ञ पिछले कई सप्ताह से लगातार काम कर रहे हैं। टीम ने भवन के नीचे विशेष जैक सिस्टम स्थापित कर उसे चरणबद्ध तरीके से ऊपर उठाना शुरू किया। इस पूरी प्रक्रिया में भवन की संरचना को सुरक्षित बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
80 प्रतिशत काम पूरा
जानकारी के अनुसार अब तक इस परियोजना का 80 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा किया जा चुका है। विशाल धर्मशाला को लगभग 3 फीट तक ऊपर उठाया जा चुका है और शेष कार्य अगले 10 दिनों में पूरा होने की उम्मीद है। इंजीनियरों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया बेहद सावधानी और तकनीकी सटीकता के साथ की जा रही है ताकि भवन को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।
लोगों के लिए बना आकर्षण का केंद्र
धर्मशाला को हवा में उठाने जैसा यह अनूठा दृश्य स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। प्रतिदिन सैकड़ों लोग इस तकनीकी कार्य को देखने पहुंच रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने पहली बार किसी इतने बड़े भवन को बिना तोड़े ऊपर उठते देखा है। यह दृश्य किसी अजूबे से कम नहीं लग रहा।
जिले में पहली बार हुआ ऐसा कार्य
विशेषज्ञों का दावा है कि जैसलमेर जिले में इस प्रकार का यह पहला प्रोजेक्ट है। इंजीनियर प्रवीण कुमार ने बताया कि इसी तकनीक का उपयोग कर पुराने मकानों, धार्मिक स्थलों और अन्य भवनों को भी सुरक्षित तरीके से ऊंचा उठाया जा सकता है। इससे भवनों को तोड़े बिना उनकी संरचना में आवश्यक बदलाव संभव हो जाते हैं।
इंजीनियरिंग कौशल का बेहतरीन उदाहरण
रामदेवरा में चल रहा यह प्रोजेक्ट आधुनिक इंजीनियरिंग और तकनीकी दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद यह कार्य भविष्य में देशभर में ऐसे कई निर्माण कार्यों के लिए प्रेरणा बन सकता है। स्थानीय प्रशासन और धर्मशाला प्रबंधन को उम्मीद है कि इसके बाद जलभराव की समस्या से स्थायी राहत मिलेगी।