#बिजनेस

कमजोर रुपये से बढ़ी कंपनियों की मुश्किलें, युआन में कारोबार पर विशेषज्ञों की चेतावनी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार आ रही कमजोरी का असर अब भारतीय उद्योगों और कारोबारियों पर साफ दिखाई देने लगा है। चीन से कच्चा माल आयात करने वाली कंपनियों की लागत बढ़ गई है, जिससे उनके बजट और मुनाफे पर दबाव बढ़ रहा है। इसी बीच कुछ कंपनियां चीनी मुद्रा युआन में कारोबार के विकल्प पर विचार कर रही हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसे लेकर सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

आयात लागत बढ़ने से कारोबारियों पर बढ़ा दबाव

रुपये में गिरावट का सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों पर पड़ रहा है जो चीन से कच्चा माल और जरूरी उपकरण आयात करती हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स, सेमीकंडक्टर्स, मैग्नेट, कॉपर और एल्युमिनियम जैसे उत्पादों की लागत बढ़ने से उत्पादन खर्च में इजाफा हुआ है। उद्योग जगत का कहना है कि कमजोर रुपया निर्यात को प्रतिस्पर्धी तो बनाता है, लेकिन आयात आधारित उद्योगों के लिए यह दोहरी चुनौती पैदा कर देता है।

कुछ कंपनियां तलाश रही हैं युआन का विकल्प

विदेशी मुद्रा दबाव को कम करने के लिए कुछ भारतीय कंपनियां चीनी मुद्रा युआन में लेन-देन की संभावनाओं पर विचार कर रही हैं। उनका मानना है कि इससे डॉलर पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है। हालांकि, फिलहाल यह प्रयोग सीमित स्तर पर ही देखने को मिल रहा है और अधिकतर व्यवसाय अभी भी पारंपरिक डॉलर आधारित भुगतान प्रणाली को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।

MSME सेक्टर अब भी डॉलर पर कर रहा भरोसा

विशेषज्ञों के अनुसार, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए युआन में कारोबार करना आसान नहीं है। बड़ी कंपनियों के पास वित्तीय जोखिम संभालने के लिए विशेष टीमें और मजबूत बैंकिंग नेटवर्क होते हैं, जबकि छोटे कारोबारी डॉलर आधारित प्रणाली को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक मानते हैं। उनका कहना है कि जब तक बैंकिंग प्रक्रिया को सरल नहीं बनाया जाता, तब तक युआन में लेन-देन का दायरा सीमित ही रहेगा।

युआन अपनाने में छिपे हैं कई जोखिम

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि केवल डॉलर से बचने के उद्देश्य से युआन को अपनाना दीर्घकालिक समाधान नहीं माना जा सकता। चीन का केंद्रीय बैंक समय-समय पर अपनी मुद्रा की कीमत में बदलाव कर सकता है, जिससे विनिमय दर का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा भारत का चीन के साथ बड़ा व्यापार घाटा भी चिंता का विषय है, क्योंकि निर्यात के मुकाबले आयात अधिक होने से भुगतान प्रणाली पर निर्भरता बढ़ सकती है।

घरेलू उत्पादन बढ़ाना माना जा रहा स्थायी समाधान

उद्योग जगत के कई विशेषज्ञों का मानना है कि युआन में भुगतान करना सिर्फ एक अस्थायी विकल्प हो सकता है। उनका कहना है कि दीर्घकालिक समाधान घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना, सप्लाई चेन को मजबूत करना और आयात पर निर्भरता कम करना है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा का दबाव घटेगा, बल्कि भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत होगी।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *