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सीकर: 7 दिन से लापता मासूम भावेश की तलाश जारी, जंगल में मेगा सर्च ऑपरेशन

सीकर जिले के निमोद की दुर्गम पहाड़ियों में लापता हुए मासूम भावेश का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। लगातार सात दिनों से चल रहे सर्च ऑपरेशन के बावजूद पुलिस, एसडीआरएफ, वन विभाग और ग्रामीणों की संयुक्त टीम को सफलता नहीं मिली है। मासूम की तलाश में पूरा इलाका एक बड़े सर्च मिशन में तब्दील हो गया है, जबकि परिजनों का इंतजार हर गुजरते दिन के साथ और गहरा होता जा रहा है।

सात दिनों से घने जंगलों में तलाश, बढ़ी मुश्किलें

निमोद की पहाड़ियों में चल रहा यह सर्च ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। घने जंगल, खतरनाक चट्टानें और गहरी खाइयों के बीच टीमें लगातार हर कोना खंगाल रही हैं। कई जगहों पर जवानों को रस्सियों के सहारे उतरना पड़ रहा है, जबकि फिसलन भरे रास्तों के कारण कई बार वे हादसों से बाल-बाल बचे हैं। इसके बावजूद सभी टीमें लगातार अभियान में जुटी हुई हैं।

एसडीआरएफ, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई

इस मेगा सर्च ऑपरेशन में सीकर जिले के 10 थानों की पुलिस के साथ एसडीआरएफ और वन विभाग की टीमें शामिल हैं। पहाड़ी क्षेत्र को अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। ड्रोन कैमरों और इंटेलिजेंस इनपुट की मदद से भी इलाके की निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी सुराग को छोड़ा न जाए।

मां का दर्द और परिवार की टूटती उम्मीदें

मासूम भावेश के घर का माहौल गहरे दुख और इंतजार में डूबा हुआ है। मां हर पल दरवाजे की ओर देखती रहती है कि शायद उसका बेटा वापस आ जाए। घर में उसके खिलौने और कपड़े उसकी मौजूदगी की याद दिलाते हैं, लेकिन आंगन सूना पड़ा है। हर गुजरता दिन परिवार की चिंता को और बढ़ा रहा है।

दर्शन के दौरान लापता हुआ था मासूम

जानकारी के अनुसार भावेश अपने ननिहाल सीकर आया हुआ था और परिजनों के साथ निमोद गांव की पहाड़ी पर स्थित हिंगलाज माता मंदिर दर्शन के लिए गया था। इसी दौरान वह अचानक लापता हो गया। घटना के तुरंत बाद ही पुलिस ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया था, लेकिन कई दिनों की कोशिशों के बावजूद अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है।

प्रशासन का कहना: हर संभव प्रयास जारी

पुलिस अधिकारियों के अनुसार पहाड़ी क्षेत्र में लगातार व्यापक सर्च अभियान चलाया जा रहा है। लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में हर जगह की बारीकी से तलाशी ली जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि ड्रोन निगरानी, तकनीकी सहायता और सभी संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है ताकि बच्चे को जल्द से जल्द ढूंढा जा सके।

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