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सेकंड हैंड कार और स्मार्टफोन की बढ़ी मांग, भारत में रिकॉर्ड बिक्री, क्यों बढ़ रहा यूज्ड मार्केट?

भारत में सेकंड हैंड और रीफर्बिश्ड स्मार्टफोन व कारों की मांग तेजी से बढ़ रही है। बढ़ती कीमतों, महंगाई और नए प्रोडक्ट्स की लागत में वृद्धि के कारण उपभोक्ता अब यूज्ड और प्री-ओन्ड मार्केट की ओर रुख कर रहे हैं। रिसर्च रिपोर्ट्स के अनुसार यह सेक्टर लगातार तेज़ी से विस्तार कर रहा है।

सेकंड हैंड स्मार्टफोन मार्केट में तेज़ी

काउंटरपॉइंट्स रिसर्च के अनुसार, इस साल जनवरी से मई के बीच भारत में कुल स्मार्टफोन बिक्री में रीफर्बिश्ड और प्री-ओन्ड डिवाइसेज की हिस्सेदारी लगभग 26% तक पहुंच गई है।पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 23% था। इसका मतलब है कि कम समय में ही सेकंड हैंड स्मार्टफोन बाजार में स्पष्ट वृद्धि दर्ज हुई है।विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड काल को छोड़कर यह सेक्टर अब तक की सबसे तेज़ ग्रोथ दिखा रहा है।

कीमतों में बढ़ोतरी से बदला उपभोक्ता व्यवहार

स्मार्टफोन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतों को बदल दिया है।रिपोर्ट्स के अनुसार मेमोरी चिप्स की कीमतें 2 से 3 गुना तक बढ़ गई हैं, जिसका सीधा असर मोबाइल फोन की लागत पर पड़ा है।इसके अलावा AI डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग ने भी सेमीकंडक्टर चिप्स की कीमतें बढ़ा दी हैं, जिससे कई हैंडसेट की कीमतों में 30–35% तक की वृद्धि देखी गई है।

बजट स्मार्टफोन बाजार पर असर

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार कीमत बढ़ने के कारण 10,000 रुपये से कम कीमत वाले 4G स्मार्टफोन लगभग बाजार से गायब हो चुके हैं।इस स्थिति में उपभोक्ता अब नए फोन की जगह रीफर्बिश्ड और सेकंड हैंड विकल्पों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

सेकंड हैंड कार बाजार में भी तेज़ ग्रोथ

ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है। क्रिसिल रिसर्च के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में सेकंड हैंड कारों की बिक्री लगभग 9% बढ़कर 61 लाख यूनिट तक पहुंच गई है। इसके मुकाबले, नई कारों की बिक्री 8% की बढ़ोतरी के साथ 46.4 लाख यूनिट रही है।यह दर्शाता है कि यूज्ड कार बाजार अब नई कार बाजार के मुकाबले मजबूत प्रतिस्पर्धा दे रहा है।

कीमतों में बढ़ोतरी और GST का असर

नई कारों की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। हाल ही में दो बार कीमतें बढ़ने से औसतन 5% तक का इजाफा हुआ है। कुछ हद तक मांग को सितंबर में जीएसटी दरों में कटौती से समर्थन मिला, लेकिन कुल मिलाकर वाहन महंगे बने हुए हैं।

महानगरों में सबसे ज्यादा मांग

Cars24 के डेटा के अनुसार सेकंड हैंड कारों की मांग का सबसे बड़ा हिस्सा महानगरों से आता है, जो लगभग 66% से अधिक है। यह दर्शाता है कि शहरी उपभोक्ता अब प्री-ओन्ड वाहनों को एक व्यावहारिक और किफायती विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

भविष्य का ट्रेंड क्या कहता है?

विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में सेकंड हैंड स्मार्टफोन बाजार में लगभग 12% की वृद्धि हो सकती है, जबकि नए स्मार्टफोन बाजार में गिरावट की संभावना है। यह बदलाव डिजिटल और ऑटोमोबाइल दोनों सेक्टर में उपभोक्ता व्यवहार के बड़े परिवर्तन को दर्शाता है।

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