भरत तिवारी एनकाउंटर केस में नया मोड़, तीन FIR दर्ज, पिता-भाई पर भी गंभीर आरोप
बिहार के बहुचर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस केस में अब तक तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें मृतक के पिता और भाई का नाम भी शामिल किया गया है। वहीं सड़क जाम और विरोध प्रदर्शन को लेकर 50 से अधिक लोगों पर भी मामला दर्ज किया गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है, जबकि एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार तेज हो रही है।
पिता और भाई पर FIR से बढ़ा विवाद
पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक प्राथमिकी में भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि उन्होंने कथित रूप से भरत को संरक्षण दिया और उसके पास मौजूद अवैध हथियारों को छिपाने में मदद की। यह कार्रवाई शाहपुर थाना पुलिस द्वारा दर्ज की गई है। इस कदम के बाद परिवार और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया है और मामले ने नया कानूनी मोड़ ले लिया है।
विरोध प्रदर्शन और सड़क जाम पर बड़ी कार्रवाई
एनकाउंटर के बाद हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने एक और बड़ी एफआईआर दर्ज की है। इसमें 14 नामजद और 50 से अधिक अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने शव के साथ आरा-बक्सर फोरलेन को जाम कर दिया, जिससे कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहा। पुलिस का कहना है कि इस दौरान सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई गई और कानून-व्यवस्था को नुकसान हुआ।
एनकाउंटर की पूरी घटना पर पुलिस का दावा
पुलिस के अनुसार 17 जून की सुबह शाहपुर थाना क्षेत्र के बेलौटी गांव में कार्रवाई के दौरान यह मुठभेड़ हुई। पुलिस को सूचना मिली थी कि भरत तिवारी के पास अवैध हथियार हैं। टीम जब मौके पर पहुंची तो भरत ने कथित रूप से पुलिस पर हमला करने का प्रयास किया, जिसके बाद मुठभेड़ हुई। इस दौरान वह गोली लगने से घायल हुआ और बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
वायरल वीडियो और उठते सवाल
घटना के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने मामले को और विवादित बना दिया है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि भरत ने हथियार पुलिस की ओर फेंका था, जिसके बाद भी उसे गोली मारी गई। इस वीडियो के सामने आने के बाद कई संगठनों और राजनीतिक दलों ने एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाएगा।
राजनीतिक बयानबाजी से गरमाई सियासत
इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए एसआईटी या न्यायिक जांच की मांग की है। साथ ही पीड़ित परिवार को मुआवजा और अन्य सहायता देने की मांग भी की जा रही है। दूसरी ओर पुलिस और प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से चल रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है।