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बीज निगम घूसकांड पर बढ़ा राजनीतिक घमासान, FIR की भाषा से नाराज हुए मंत्री किरोड़ी लाल मीणा

राजस्थान राज्य बीज निगम से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित घूसकांड ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की एफआईआर में ‘डॉक्टर’ और ‘मंत्री’ जैसे शब्दों के उल्लेख पर कृषि एवं बागवानी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने एसीबी मुख्यालय पहुंचकर मामले में स्पष्टीकरण मांगा और इसे अपनी छवि धूमिल करने की साजिश बताया। वहीं विपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार और मंत्री दोनों पर सवाल उठाए हैं।

FIR की भाषा पर मंत्री ने जताई आपत्ति

राजस्थान राज्य बीज निगम में सामने आए कथित घूसकांड की जांच के दौरान एसीबी ने निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी चर्चाओं में ‘एक डॉक्टर’ और ‘एक मंत्री’ की संभावित भूमिका का जिक्र सामने आया। इसी पर मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि वे स्वयं पेशे से डॉक्टर हैं और संबंधित विभाग के मंत्री भी हैं, इसलिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल सीधे तौर पर उनकी प्रतिष्ठा को प्रभावित करता है। उन्होंने एसीबी से स्पष्ट करने की मांग की कि एफआईआर में किन व्यक्तियों की ओर संकेत किया गया है।

एसीबी मुख्यालय पहुंचकर उठाए सवाल

मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने एसीबी कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों के समक्ष अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यदि जांच एजेंसी के पास उनके खिलाफ कोई ठोस तथ्य हैं तो कार्रवाई की जाए, लेकिन अस्पष्ट शब्दों का उपयोग कर सार्वजनिक भ्रम पैदा करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनका नाम मामले से जुड़ा नहीं है तो एसीबी को सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। मंत्री ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए उच्च स्तर पर जांच कराने की बात भी कही है।

भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के बीच बढ़ा विवाद

पिछले कुछ समय से किरोड़ी लाल मीणा नकली बीज, खाद और कृषि से जुड़े अनियमित मामलों के खिलाफ लगातार सक्रिय रहे हैं। उन्होंने कई स्थानों पर निरीक्षण और कार्रवाई कर भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख दिखाया था। ऐसे समय में उनके विभाग से जुड़े अधिकारियों का घूस प्रकरण में गिरफ्तार होना राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम ने मंत्री की भ्रष्टाचार विरोधी छवि को चुनौती दी है और इसी कारण मामला अधिक संवेदनशील बन गया है।

विपक्ष ने सरकार और मंत्री को घेरा

कांग्रेस नेताओं ने इस विवाद को लेकर राज्य सरकार और मंत्री पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों की गतिविधियों और विभागीय कार्यप्रणाली की भी गहन जांच होनी चाहिए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि किसी बड़े भ्रष्टाचार प्रकरण में विभागीय अधिकारी शामिल पाए जाते हैं तो जवाबदेही केवल अधिकारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। वहीं मंत्री ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक प्रेरित बताते हुए खारिज किया है और कहा है कि वे किसी भी जांच का सामना करने को तैयार हैं।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चाएं

पूरा मामला सामने आने के बाद राजस्थान की राजनीति में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विवाद का केंद्र केवल एफआईआर की भाषा नहीं बल्कि उससे उत्पन्न राजनीतिक संदेश भी है। सरकार के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि एसीबी आगे क्या स्पष्टीकरण देती है और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। आने वाले दिनों में यह मामला राजस्थान की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना रह सकता है।

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