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राजस्थान बॉर्डर पर बुलडोजर एक्शन: बाड़मेर में अवैध निर्माण ध्वस्त, सियासत गरमाई

राजस्थान के बाड़मेर जिले में भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा के 15 किलोमीटर दायरे में अवैध निर्माणों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों और सुरक्षा एजेंसियों की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत BSF और प्रशासन ने संयुक्त अभियान चलाते हुए कई ढांचों को ध्वस्त किया। इस कार्रवाई के बाद सीमावर्ती इलाकों में तनाव और राजनीतिक बहस दोनों तेज हो गए हैं।

गडरारोड और चौहटन में चला बुलडोजर

प्रशासनिक जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई पहले से तय योजना के तहत की गई थी। बाड़मेर के गडरारोड क्षेत्र के मालाणा, हमीरानी और केरकोरी गांवों में अवैध निर्माण हटाए गए। वहीं चौहटन क्षेत्र के बाखासर, समेलो का तला, भलगांव और डेम्बा गांवों में भी चिन्हित ढांचों को जमींदोज किया गया।

इन सभी स्थानों पर कार्रवाई से पहले तहसील स्तर पर सर्वे किया गया था और कब्जाधारियों को 18 जून तक स्वयं निर्माण हटाने का नोटिस दिया गया था। समय सीमा समाप्त होने के बाद प्रशासन ने BSF और पुलिस बल की मौजूदगी में यह कार्रवाई की।

सीमावर्ती ग्रामीणों में नाराजगी

कार्रवाई के बाद सीमावर्ती इलाकों में स्थानीय लोगों में असंतोष देखा गया। कई ग्रामीणों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने इसे एकतरफा और बिना पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था के उठाया गया कदम बताया। उनका कहना है कि वे लंबे समय से इन इलाकों में रह रहे हैं और अचानक हटाए जाने से उनके सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

पूर्व मंत्री हरीश चौधरी का बयान

बायतु विधायक और पूर्व मंत्री हरीश चौधरी ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुरक्षा के नाम पर आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बॉर्डर क्षेत्र के सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र की पहचान भाईचारे और एकता से है और इसे किसी भी राजनीतिक एजेंडे के तहत नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए। चौधरी ने यह भी कहा कि किसानों और युवाओं के असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है।

सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने उठाए सवाल

बाड़मेर-जैसलमेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने भी कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक समन्वय पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई ग्रामीणों को मिले नोटिस में धार्मिक स्थलों और निजी भूमि पर बने ढांचों को हटाने की बात कही गई है।

सांसद के अनुसार जब उन्होंने जिला कलेक्टर से बात की तो उन्होंने इस पूरी कार्रवाई की जानकारी होने से इनकार किया, जो स्थिति को और गंभीर बनाता है।

प्रशासन का पक्ष और नोटिस प्रक्रिया

प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। सभी संबंधित भू-स्वामियों को पहले नोटिस जारी किए गए थे और निर्धारित समय सीमा के बाद ही अवैध निर्माण हटाए गए। सुरक्षा एजेंसियों की मौजूदगी में यह सुनिश्चित किया गया कि कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से हो।

सुरक्षा बनाम सामाजिक संतुलन की बहस

यह पूरा मामला अब केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सुरक्षा और सामाजिक संतुलन की बहस का रूप ले चुका है। एक ओर सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत बताई जा रही है, तो दूसरी ओर स्थानीय समुदाय के अधिकारों और जीवनशैली को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

निष्कर्ष

बाड़मेर बॉर्डर पर हुई यह कार्रवाई प्रशासनिक और सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन इसके साथ ही राजनीतिक और सामाजिक विवाद भी गहराते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक चर्चा में रह सकता है, क्योंकि सरकार, प्रशासन और स्थानीय समुदाय के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

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