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ब्लड शुगर नॉर्मल होने पर भी डॉक्टर क्यों लिखते हैं HbA1c टेस्ट? Mayo Clinic से समझिए वजह

ब्लड शुगर की रिपोर्ट सामान्य आने के बाद भी डॉक्टर कई बार HbA1c टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। इसकी वजह यह है कि सामान्य शुगर टेस्ट केवल उस समय का ग्लूकोज स्तर बताता है, जबकि HbA1c जांच पिछले 2 से 3 महीनों के औसत ब्लड शुगर की जानकारी देती है। Mayo Clinic और अन्य स्वास्थ्य संस्थाओं के अनुसार यह टेस्ट डायबिटीज की पहचान और उसके नियंत्रण का बेहतर आकलन करने में मदद करता है।

केवल एक दिन की शुगर रिपोर्ट से नहीं मिलती पूरी तस्वीर

कई लोग फास्टिंग या रैंडम ब्लड शुगर रिपोर्ट सामान्य आने के बाद यह मान लेते हैं कि उन्हें डायबिटीज का कोई खतरा नहीं है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एक दिन की रिपोर्ट हमेशा शरीर की वास्तविक स्थिति नहीं बताती। कई बार टेस्ट वाले दिन शुगर सामान्य होती है, जबकि पिछले कई हफ्तों या महीनों में उसका स्तर अधिक रहा हो। ऐसे मामलों में HbA1c टेस्ट शरीर में लंबे समय से मौजूद शुगर के प्रभाव को समझने में मदद करता है।

क्या होता है HbA1c टेस्ट और कैसे करता है काम?

Mayo Clinic के अनुसार HbA1c या A1c टेस्ट खून में हीमोग्लोबिन से जुड़ी ग्लूकोज की मात्रा को मापता है। लाल रक्त कोशिकाओं की आयु लगभग तीन महीने होती है, इसलिए यह जांच पिछले 2 से 3 महीनों के औसत ब्लड शुगर का संकेत देती है। यदि लंबे समय तक रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ा हुआ रहता है तो उसका असर HbA1c रिपोर्ट में दिखाई देता है। इसी कारण यह टेस्ट डायबिटीज की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

डॉक्टर क्यों देते हैं HbA1c टेस्ट की सलाह?

CDC के अनुसार HbA1c जांच यह समझने में मदद करती है कि व्यक्ति सामान्य स्थिति में है, प्रीडायबिटीज की अवस्था में है या उसे डायबिटीज हो चुकी है। पहले से डायबिटीज से पीड़ित लोगों में यह टेस्ट यह भी बताता है कि दवाएं, खानपान और जीवनशैली में किए गए बदलाव कितने प्रभावी साबित हो रहे हैं। यही वजह है कि डॉक्टर केवल फास्टिंग शुगर रिपोर्ट पर निर्भर नहीं रहते और HbA1c टेस्ट को भी महत्वपूर्ण मानते हैं।

सामान्य शुगर टेस्ट और HbA1c में क्या है अंतर?

फास्टिंग ब्लड शुगर या रैंडम शुगर टेस्ट उस समय शरीर में मौजूद ग्लूकोज स्तर की जानकारी देता है। इसके विपरीत HbA1c टेस्ट लंबे समय के औसत ब्लड शुगर को दर्शाता है। इसलिए किसी व्यक्ति की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए दोनों जांचों का अपना अलग महत्व होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एक दिन की रिपोर्ट के आधार पर डायबिटीज की पुष्टि या खारिज करना सही नहीं माना जाता।

HbA1c की सामान्य रेंज कितनी मानी जाती है?

अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन (ADA) के अनुसार HbA1c का स्तर 5.7 प्रतिशत से कम होने पर उसे सामान्य माना जाता है। 5.7 से 6.4 प्रतिशत के बीच का स्तर प्रीडायबिटीज का संकेत माना जाता है, जबकि 6.5 प्रतिशत या उससे अधिक परिणाम डायबिटीज की संभावना की ओर इशारा कर सकता है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और अन्य जांच रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर ही तय करते हैं।

किन लोगों के लिए जरूरी हो सकता है यह टेस्ट?

जिन लोगों के परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, जिनका वजन अधिक है, जिनकी उम्र 35 वर्ष से ज्यादा है या जो हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, उन्हें समय-समय पर HbA1c टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है। इसके अलावा प्रीडायबिटीज और पहले से डायबिटीज के मरीजों के लिए भी यह जांच नियमित निगरानी का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

HbA1c बढ़ा हुआ आने पर क्या करना चाहिए?

यदि HbA1c रिपोर्ट सामान्य सीमा से अधिक आती है तो घबराने की आवश्यकता नहीं होती। डॉक्टर आमतौर पर संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और जरूरत पड़ने पर दवाओं की सलाह देते हैं। कई मामलों में जीवनशैली में सुधार करके HbA1c स्तर को बेहतर किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन करने से डायबिटीज से जुड़ी जटिलताओं के खतरे को कम किया जा सकता है।

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