G7 से पहले भारत-अमेरिका तनाव: नाविकों की मौत पर मचा विवाद
फ्रांस में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन से पहले भारत और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है। होर्मुज स्ट्रेट में कथित अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात तय मानी जा रही है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी प्रशासन के रुख और शुरुआती बयान पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अमेरिकी विशेषज्ञों ने भी सरकार की प्रतिक्रिया को असंवेदनशील बताया है, जिससे कूटनीतिक तनाव और बढ़ गया है।
भारतीय नाविकों की मौत पर उठे सवाल
रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट में एक जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई। इस घटना के बाद भारत में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। आरोप है कि अमेरिकी प्रशासन ने अपने शुरुआती बयान में मृतकों का उल्लेख तक नहीं किया और केवल इसे प्रतिबंध उल्लंघन से जुड़ा मामला बताया। इस रवैये को लेकर भारत में नाराजगी बढ़ी है और इसे गंभीर कूटनीतिक संवेदनशीलता का मुद्दा माना जा रहा है।
अमेरिका के बयान पर भड़के एक्सपर्ट
अमेरिकी विदेश विभाग और प्रशासन के रुख पर कई विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं। अमेरिका के एशिया मामलों के जानकार डेरेक जे. ग्रॉसमैन ने कहा कि इस मामले में संवेदनशीलता की कमी दिखी है। उन्होंने अमेरिकी बयान को “असंतुलित और कठोर” बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान भारत-अमेरिका संबंधों में भरोसे की कमी को और गहरा कर सकते हैं, जो पहले से ही आर्थिक और राजनीतिक तनाव से गुजर रहे हैं।
G7 में मोदी-ट्रंप मुलाकात पर नजर
G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच संभावित मुलाकात को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज है। माना जा रहा है कि इस बातचीत में भारतीय नाविकों की मौत, सुरक्षा मुद्दे और द्विपक्षीय संबंध प्रमुख एजेंडे में हो सकते हैं। भारत में राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है कि इस मुद्दे को सख्ती से उठाया जाए और स्पष्ट जवाब मांगा जाए।
भारत-अमेरिका रिश्तों में बढ़ता तनाव
हाल के महीनों में भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। व्यापारिक नीतियों, टैरिफ और रणनीतिक मतभेदों ने संबंधों को प्रभावित किया है। अब इस नए विवाद ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद “भरोसे की कमी” को और उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि G7 में होने वाली यह मुलाकात आने वाले समय में रिश्तों की दिशा तय कर सकती है।