गंगा जल पर नया तनाव: पद्मा बैराज और चीन कनेक्शन से बढ़ा विवाद
भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। बांग्लादेश द्वारा पद्मा नदी पर 2.1 किलोमीटर लंबा नया बैराज बनाने की घोषणा के बाद क्षेत्रीय राजनीति गरमा गई है। दावा है कि इस परियोजना में चीन की भूमिका हो सकती है, जिससे भारत की सुरक्षा और जल कूटनीति पर असर पड़ सकता है। फरक्का बैराज, गंगा जलसंधि और तीस्ता विवाद पहले से ही दोनों देशों के रिश्तों में संवेदनशील मुद्दे रहे हैं। अब यह नया प्रोजेक्ट पूरे दक्षिण एशिया में जल संसाधनों को लेकर नई बहस खड़ी कर रहा है।
पद्मा बैराज प्रोजेक्ट: बांग्लादेश की बड़ी योजना
बांग्लादेश सरकार ने पद्मा नदी पर 2.1 किमी लंबा बैराज बनाने की योजना घोषित की है। बांग्लादेश में गंगा को पद्मा कहा जाता है। यह परियोजना फरक्का बैराज से लगभग 180 किलोमीटर दूर बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बैराज की जल भंडारण क्षमता बहुत अधिक होगी और इसका उद्देश्य दक्षिण-पश्चिम और उत्तरी बांग्लादेश के लाखों लोगों को जल आपूर्ति सुनिश्चित करना है। सरकार का दावा है कि यह प्रोजेक्ट कृषि, पेयजल और बाढ़ नियंत्रण में मदद करेगा, लेकिन इसके भारत के साथ जल-साझेदारी संबंधों पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
फरक्का बैराज और गंगा जलसंधि का विवाद
भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 की गंगा जल संधि के तहत फरक्का बैराज से पानी के बंटवारे का प्रावधान किया गया था। इस समझौते के अनुसार दोनों देशों को निश्चित मात्रा में जल उपलब्ध कराया जाता है, खासकर सूखे के मौसम में। लेकिन बांग्लादेश लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि फरक्का बैराज के कारण उसके कई क्षेत्रों में जल संकट पैदा होता है। वहीं भारत का कहना है कि यह परियोजना कोलकाता बंदरगाह की सफाई और नदी प्रवाह को संतुलित रखने के लिए जरूरी है। यह विवाद समय-समय पर दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित करता रहा है।
चीन कनेक्शन और क्षेत्रीय चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार इस नए पद्मा बैराज प्रोजेक्ट में चीन की भागीदारी की संभावना जताई जा रही है। इससे भारत में सुरक्षा और रणनीतिक चिंता बढ़ सकती है, खासकर सिलिगुड़ी कॉरिडोर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के संदर्भ में। चीन पहले से ही दक्षिण एशिया में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में सक्रिय रहा है और उसे “वाटर मैनेजमेंट पावर” के रूप में देखा जाता है। यदि यह परियोजना चीन की मदद से आगे बढ़ती है, तो यह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और जल कूटनीति पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है।
तीस्ता विवाद और भविष्य की चुनौती
भारत और बांग्लादेश के बीच केवल गंगा ही नहीं, बल्कि तीस्ता नदी को लेकर भी लंबे समय से विवाद जारी है। जल बंटवारे पर सहमति न बन पाने के कारण कई समझौते अटके हुए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि नए बैराज और पुराने विवाद एक साथ बढ़ते हैं, तो यह दक्षिण एशिया में जल संकट और राजनीतिक तनाव दोनों को बढ़ा सकता है। आने वाले समय में गंगा जलसंधि का नवीनीकरण और क्षेत्रीय सहयोग इस विवाद को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।