India-Pakistan Talks: ‘भारत से शांति में ही पाकिस्तान की भलाई’, पाकिस्तानी विशेषज्ञों ने फिर शुरू की बातचीत की वकालत
भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बीच पाकिस्तान के कई पूर्व राजनयिक और विशेषज्ञ दोनों देशों के बीच बैकचैनल संवाद बहाल करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में टकराव के बजाय बातचीत और शांति बनाए रखना पाकिस्तान के हित में है। साथ ही भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता और जल विवाद को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
बैकचैनल बातचीत की जरूरत पर जोर
पाकिस्तान की पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने एक लेख में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के संबंध बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच औपचारिक कूटनीतिक संवाद लगभग ठप है और कोई भी पक्ष गतिरोध तोड़ने की पहल करता नजर नहीं आ रहा। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी बड़े संकट से बचने के लिए बैकचैनल बातचीत का जारी रहना जरूरी है।
भारत के साथ शांति को बताया पाकिस्तान के हित में
विदेश में रह रहे कुछ पाकिस्तानी शिक्षाविदों और विश्लेषकों का मानना है कि भारत के साथ स्थायी शांति पाकिस्तान के आर्थिक और सामाजिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है। उनका तर्क है कि क्षेत्रीय सहयोग से शिक्षा, व्यापार और तकनीकी विकास के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों के बीच संवाद बंद होने से नुकसान दोनों पक्षों को उठाना पड़ता है।
सिंधु जल संधि और जल सुरक्षा पर जताई चिंता
मलीहा लोधी ने अपने लेख में सिंधु जल संधि को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि जल संसाधनों से जुड़े विवाद भविष्य में दोनों देशों के बीच तनाव की नई वजह बन सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के कृषि क्षेत्र और जल सुरक्षा के लिए यह मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि इस विषय पर भारत का आधिकारिक रुख पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है।
भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता का किया जिक्र
पाकिस्तानी विश्लेषकों ने भारत के बढ़ते रक्षा बजट और आधुनिक हथियारों की खरीद का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और ऐसे में दोनों देशों के बीच संचार के चैनल खुले रहना जरूरी है। विशेषज्ञों के मुताबिक संवाद की कमी से गलतफहमियों और तनाव का जोखिम बढ़ सकता है।
आधिकारिक संकेतों का अब भी इंतजार
पाकिस्तानी पक्ष की ओर से बातचीत की जरूरत पर लगातार बयान सामने आ रहे हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच किसी नई औपचारिक वार्ता को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य में हालात सामान्य करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों की भूमिका अहम रहेगी।