दूसरी बार राजस्थान पहुंचा चीता KP-3, रेस्क्यू कर कूनो नेशनल पार्क भेजा गया
भरतपुर में 15 दिन तक डेरा जमाए रहा चीता
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकला चीता KP-3 करीब 15 दिनों तक राजस्थान के भरतपुर जिले में मौजूद रहा। बांध बारेठा वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में उसकी लगातार मौजूदगी के कारण वन विभाग की निगरानी बढ़ा दी गई थी। स्थानीय ग्रामीणों में भी उसकी गतिविधियों को लेकर चिंता का माहौल था। वन विभाग और कूनो नेशनल पार्क की संयुक्त टीम लगातार उसकी लोकेशन ट्रैक कर रही थी। आखिरकार विशेषज्ञों ने सफल ऑपरेशन चलाकर चीते को सुरक्षित तरीके से ट्रेंकुलाइज किया और उसे वापस कूनो नेशनल पार्क पहुंचा दिया।
लगभग 200 किलोमीटर का सफर तय कर पहुंचा था राजस्थान
वन अधिकारियों के अनुसार KP-3 कूनो नेशनल पार्क से निकलकर लंबी दूरी तय करते हुए भरतपुर जिले तक पहुंच गया था। चीते के मूवमेंट पर लगातार नजर रखी जा रही थी और उसके व्यवहार का अध्ययन भी किया जा रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि खुले वातावरण में छोड़े गए चीते अक्सर नए क्षेत्रों की तलाश में लंबी दूरी तय करते हैं। इसी क्रम में KP-3 भी अपने निर्धारित क्षेत्र से बाहर निकल गया और राजस्थान के वन क्षेत्रों तक पहुंच गया।
संयुक्त अभियान में सफल रहा वन विभाग
चीते को सुरक्षित पकड़ने के लिए भरतपुर वन विभाग और कूनो नेशनल पार्क की टीम ने संयुक्त अभियान चलाया। कई दिनों तक उसकी गतिविधियों की निगरानी करने के बाद उपयुक्त अवसर मिलने पर उसे ट्रेंकुलाइज किया गया। इसके बाद चिकित्सकीय जांच कर उसे विशेष सुरक्षा के साथ कूनो नेशनल पार्क ले जाया गया। अधिकारियों ने बताया कि पूरी प्रक्रिया वन्यजीव संरक्षण के मानकों के अनुरूप की गई और चीते को किसी प्रकार की चोट नहीं पहुंची।
पहले भी राजस्थान पहुंच चुका है KP-3
यह पहली बार नहीं है जब KP-3 राजस्थान पहुंचा हो। इससे पहले भी वह कूनो नेशनल पार्क की सीमा से निकलकर राजस्थान के बारां और झालावाड़ जिलों तक पहुंच गया था। उस समय भी विशेषज्ञ टीम ने उसे ट्रेंकुलाइज कर वापस कूनो के कोर एरिया में छोड़ा था। हालांकि कुछ समय बाद उसने फिर से लंबी दूरी तय की और इस बार भरतपुर के वन क्षेत्र में पहुंच गया। इससे स्पष्ट है कि KP-3 लगातार नए क्षेत्रों की खोज में सक्रिय रहा है।
कूनो के चीतों को आकर्षित कर रहा राजस्थान
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि कूनो के कई चीतों का मूवमेंट राजस्थान की ओर देखा गया है। इससे पहले KP-2 भी राज्य की सीमाओं तक पहुंच चुका है। राजस्थान के कुछ वन क्षेत्रों में पर्याप्त शिकार और अनुकूल वातावरण होने के कारण चीते इन इलाकों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। हालांकि वन विभाग का लक्ष्य उन्हें उनके निर्धारित संरक्षण क्षेत्र में बनाए रखना है ताकि परियोजना के उद्देश्यों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जा सके।
सुरक्षित वापसी से वन विभाग को राहत
KP-3 की सुरक्षित वापसी के बाद वन विभाग और कूनो प्रबंधन ने राहत की सांस ली है। भरतपुर क्षेत्र में उसकी मौजूदगी से स्थानीय लोगों में आशंका बनी हुई थी, जबकि विभाग को भी लगातार निगरानी करनी पड़ रही थी। अब चीते को दोबारा कूनो नेशनल पार्क में छोड़ दिया गया है, जहां उसके मूवमेंट पर पहले की तरह निगरानी जारी रहेगी। विशेषज्ञ उम्मीद कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसे मामलों के लिए बेहतर ट्रैकिंग और प्रबंधन व्यवस्था विकसित की जाएगी।