तीन भारतीय नाविकों की मौत पर सरकार की चुप्पी पर सवाल
ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों की मौत के मामले ने राजनीतिक और सामरिक बहस को तेज कर दिया है। पूर्व मेजर जनरल जीडी बख्शी ने केंद्र सरकार और अमेरिका दोनों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि तीन भारतीयों की मौत के बावजूद भारत की प्रतिक्रिया कमजोर रही है। उन्होंने इस घटना को लेकर जवाबदेही तय करने और कड़ा रुख अपनाने की मांग की है।
बख्शी का सरकार और अमेरिका पर निशाना
पूर्व मेजर जनरल जीडी बख्शी ने कहा कि चार दिनों के भीतर तीन जहाजों पर घटनाएं हुईं और तीन भारतीयों की जान चली गई, लेकिन भारत की ओर से अपेक्षित सख्त प्रतिक्रिया नहीं आई। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की “चुप्पी” चिंताजनक है और इस तरह की घटनाओं को सामान्य नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक, किसी भी भारतीय नागरिक की मौत पर सरकार को स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाना चाहिए।
अमेरिका की नीतियों पर गंभीर सवाल
बख्शी ने अमेरिका की नीतियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वह भारत पर टैरिफ और आर्थिक दबाव की बात करता है, जबकि रणनीतिक मुद्दों पर असमान व्यवहार दिखाता है। उन्होंने LCA विमान इंजन सप्लाई का उदाहरण देते हुए कहा कि तय समय पर अपेक्षित इंजन नहीं मिले। उनका कहना था कि जब भारत ने उच्च स्तर पर यह मुद्दा उठाया, तब कुछ अतिरिक्त इंजन उपलब्ध कराए गए, जो सहयोग की धीमी गति को दर्शाता है।
जहाज पर हमले और कार्रवाई पर विवाद
उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी बलों ने जहाज पर कार्रवाई के दौरान हेलफायर मिसाइल का इस्तेमाल कर इंजन को निशाना बनाया। बख्शी के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में पहले चेतावनी, रिकॉर्डिंग और जब्ती जैसी प्रक्रिया अपनाई जाती है, लेकिन सीधे हमला करना गंभीर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि इस घटना की पारदर्शी जांच और जवाबदेही तय होना जरूरी है।
न्याय और मुआवजे की मांग
जीडी बख्शी ने कहा कि इस पूरे मामले में मारे गए भारतीय नाविकों के लिए मुआवजे की मांग होनी चाहिए और सरकार को इस मुद्दे पर चुप्पी नहीं साधनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि तीन भारतीयों की मौत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्तों के बीच ऐसे घटनाक्रम गंभीर सवाल पैदा करते हैं, जिनका जवाब जरूरी है।