#धार्मिक #पॉलिटिक्स

मंदिर-मस्जिद कार्रवाई पर गरमाई सियासत, हनुमान बेनीवाल ने सरकार और कांग्रेस दोनों को घेरा

राजस्थान में धार्मिक स्थलों पर प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने मंदिरों और मस्जिदों पर चल रही कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। साथ ही उन्होंने विपक्षी कांग्रेस की चुप्पी पर भी निशाना साधते हुए पूरे मामले को जनता की आस्था, लोकतांत्रिक अधिकारों और प्रशासनिक संवेदनशीलता से जोड़ा है।

धार्मिक स्थलों की कार्रवाई पर उठाए सवाल

हनुमान बेनीवाल ने कहा कि विकास कार्यों के नाम पर धार्मिक स्थलों पर की जा रही कार्रवाई को केवल निर्माण या अतिक्रमण हटाने के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में करोड़ों लोगों की आस्था और सामाजिक भावनाएं भी जुड़ी होती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को किसी भी कार्रवाई से पहले स्थानीय लोगों और संबंधित समुदायों से संवाद स्थापित करना चाहिए था। बेनीवाल ने कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन विकास और जनभावनाओं के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

पूर्व सरकार के कार्यकाल से की तुलना

अपने बयान में बेनीवाल ने वर्तमान घटनाक्रम की तुलना पूर्व सरकार के समय हुए कुछ विवादित प्रशासनिक निर्णयों से भी की। उन्होंने कहा कि अतीत में भी विकास परियोजनाओं के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों को लेकर विवाद सामने आए थे। उनका आरोप है कि वर्तमान सरकार के कुछ फैसलों से लोगों को पुराने घटनाक्रमों की याद आ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे मुद्दों पर अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए ताकि अनावश्यक विवाद और सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा न हो।

कांग्रेस की चुप्पी पर भी साधा निशाना

बेनीवाल ने इस मुद्दे पर कांग्रेस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जिन नेताओं ने वर्षों तक विभिन्न समुदायों के समर्थन के आधार पर राजनीति की, वे अब ऐसे संवेदनशील मामलों पर खुलकर अपनी बात नहीं रख रहे हैं। उन्होंने विपक्ष से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग करते हुए कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि राजनीतिक दल धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर वास्तव में क्या सोच रखते हैं। उनके अनुसार लोकतंत्र में विपक्ष की जिम्मेदारी केवल आलोचना करना नहीं बल्कि स्पष्ट और जिम्मेदार पक्ष रखना भी है।

इंटरनेट बंदी को बताया प्रशासनिक विफलता का संकेत

प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने पर भी बेनीवाल ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि बार-बार इंटरनेट बंद करना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित संकेत नहीं है। इंटरनेट बंद होने से व्यापार, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाएं और आम नागरिकों का दैनिक जीवन प्रभावित होता है। उनका तर्क है कि यदि किसी कार्रवाई के लिए बार-बार इंटरनेट बंद करना पड़े, तो यह प्रशासन और जनता के बीच विश्वास की कमी को दर्शाता है। उन्होंने सरकार से ऐसे मामलों में वैकल्पिक और बेहतर प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने की मांग की।

संवाद और विश्वास से ही होगा समाधान

बेनीवाल ने कहा कि विकास कार्यों का विरोध नहीं किया जा सकता, लेकिन विकास के साथ सामाजिक विश्वास बनाए रखना भी जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रशासन को सलाह दी कि किसी भी संवेदनशील कार्रवाई से पहले स्थानीय समुदायों को विश्वास में लिया जाए। उनके अनुसार लोकतंत्र का आधार जनता का भरोसा है और यही भरोसा सरकार तथा प्रशासन को मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि संवाद की कमी अक्सर विवादों को जन्म देती है, जबकि पारदर्शिता और सहभागिता से समाधान का रास्ता निकल सकता है।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *