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मोदी के रिकॉर्ड पर सियासत: संजय राउत ने साधा निशाना, नेहरू की विरासत का किया जिक्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार सबसे लंबे समय तक कार्यरत रहने वाले प्रधानमंत्रियों की सूची में नया रिकॉर्ड बनाने से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने भारतीय जनता पार्टी द्वारा इस उपलब्धि को लेकर किए जा रहे जश्न पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी रिकॉर्ड से अधिक महत्वपूर्ण देश के लिए किया गया योगदान होता है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की भूमिका का उल्लेख करते हुए मोदी सरकार की नीतियों पर भी निशाना साधा।

रिकॉर्ड बनने से पहले शुरू हुई राजनीतिक बहस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले प्रधानमंत्री बनने की तैयारी के बीच राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। भाजपा इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बता रही है और इसे जनसमर्थन का प्रतीक मान रही है। वहीं विपक्षी दल इसे केवल आंकड़ों का खेल बताते हुए सरकार के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं। इसी क्रम में शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि केवल कार्यकाल लंबा होना ही किसी नेता की सबसे बड़ी उपलब्धि नहीं हो सकती, बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि उस दौरान देश को कितना लाभ मिला।

नेहरू के योगदान का किया उल्लेख

संजय राउत ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का जिक्र करते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत की नींव मजबूत करने में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा है। उन्होंने दावा किया कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं, औद्योगिक विकास और आधुनिक भारत की संरचना तैयार करने में नेहरू की महत्वपूर्ण भूमिका रही। राउत का कहना था कि किसी नेता की तुलना केवल कार्यकाल की अवधि से नहीं बल्कि उसके कार्यों और देश पर पड़े प्रभाव से की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि नेहरू की विरासत को केवल रिकॉर्ड के आधार पर नहीं आंका जा सकता।

मोदी सरकार की कार्यशैली पर उठाए सवाल

शिवसेना सांसद ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता प्रभावित हुई है और कई महत्वपूर्ण संस्थाएं दबाव में काम कर रही हैं। राउत ने कहा कि जनता सरकार के प्रदर्शन को देख रही है और केवल लंबे कार्यकाल से किसी सरकार की सफलता तय नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र की मजबूती और जनहित के फैसले ही किसी नेतृत्व की वास्तविक पहचान होते हैं।

75 वर्ष की उम्र वाले बयान का भी किया जिक्र

संजय राउत ने प्रधानमंत्री मोदी के उस पुराने बयान का भी उल्लेख किया जिसमें भाजपा नेताओं के लिए 75 वर्ष की उम्र के बाद सक्रिय पद छोड़ने की चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे सिद्धांतों की बात की गई थी तो उन्हें समान रूप से लागू भी किया जाना चाहिए। राउत ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को अपने घोषित मानदंडों और सिद्धांतों का पालन करना चाहिए, ताकि जनता के बीच भरोसा बना रहे।

रिकॉर्ड बनाम विरासत पर छिड़ी बहस

प्रधानमंत्री मोदी के संभावित रिकॉर्ड को लेकर जहां भाजपा इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक प्रचार का हिस्सा मान रहा है। इस बहस ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में नेतृत्व, विरासत और उपलब्धियों को लेकर चर्चा को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना रह सकता है, खासकर तब जब विभिन्न दल अपने-अपने दृष्टिकोण से इसे जनता के सामने रखने की कोशिश करेंगे।

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