रामगढ़ में शिक्षा अधिकारियों ने 22 सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन, वेतन भत्ते और पदोन्नति पर जोर
अलवर जिले के रामगढ़ क्षेत्र में राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद के आह्वान पर सरकारी विद्यालयों के पीईईओ और प्रधानाचार्यों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के नाम ज्ञापन सौंपकर शिक्षा विभाग में लंबित मुद्दों के समाधान की मांग की। ज्ञापन में वेतन भत्ते, पदोन्नति, रिक्त पदों की भर्ती और प्रशासनिक सुधारों सहित 22 सूत्रीय मांगें शामिल हैं।
तहसीलदार को सौंपा गया ज्ञापन
मंगलवार को रामगढ़ में शिक्षा विभाग के अधिकारियों और प्रधानाचार्यों ने एकत्र होकर अपनी मांगों के समर्थन में ज्ञापन सौंपा। एसडीएम की अनुपस्थिति में यह ज्ञापन तहसीलदार अंकित गुप्ता को दिया गया। परिषद के प्रतिनिधियों ने कहा कि लंबे समय से लंबित समस्याओं के कारण शिक्षा व्यवस्था और अधिकारियों के कार्य प्रभावित हो रहे हैं, इसलिए सरकार को जल्द सकारात्मक कदम उठाने चाहिए।
पदोन्नति और नए पदों की मांग
रामगढ़ के एसीबीईओ रजनीश व्यास ने बताया कि ज्ञापन में शिक्षा अधिकारियों के पदों में वृद्धि और लंबित डीपीसी प्रक्रियाओं को शीघ्र पूरा करने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई है। परिषद ने नवगठित जिलों में शिक्षा विभाग के कार्यालय स्थापित करने तथा प्रधानाचार्यों को अधिक पदोन्नति अवसर उपलब्ध कराने के लिए नए पद सृजित करने की आवश्यकता भी जताई है। उनका कहना है कि इससे प्रशासनिक कार्यों में गति आएगी और अधिकारियों का मनोबल बढ़ेगा।
विशेष भत्ता और अतिरिक्त संसाधनों की मांग
ज्ञापन में पीईईओ और यूसीईईओ पर बढ़ते अतिरिक्त कार्यभार को देखते हुए उनके मूल वेतन का 10 प्रतिशत विशेष भत्ता देने की मांग की गई है। इसके साथ ही ब्लॉक स्तर पर नोडल विद्यालयों की संख्या बढ़ाने, सूचना सहायक के पद सृजित करने और विद्यालयों में रिक्त शैक्षणिक पदों को जल्द भरने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। परिषद का मानना है कि पर्याप्त संसाधनों के बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था संभव नहीं है।
शिक्षण कार्यों पर बढ़ रहा प्रशासनिक दबाव
परिषद ने कहा कि विद्यालयों में बढ़ते प्रशासनिक और ऑनलाइन कार्यों के कारण शिक्षकों का अधिक समय गैर-शैक्षणिक गतिविधियों में खर्च हो रहा है। इससे पढ़ाई का स्तर प्रभावित हो रहा है। ज्ञापन में मांग की गई कि बिना प्रारंभिक जांच के प्रधानाचार्यों के खिलाफ कार्रवाई न की जाए और शिक्षा नीति निर्माण में शिक्षकों व शिक्षा अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। साथ ही गैर-सरकारी संगठनों के अनावश्यक हस्तक्षेप को सीमित करने की भी मांग उठाई गई।
सरकार से सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा
शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि उनकी मांगें केवल कर्मचारियों के हित तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और मजबूत बनाने से भी जुड़ी हैं। परिषद ने सरकार से आग्रह किया है कि विद्यार्थियों और शिक्षकों के हित में इन मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र निर्णय लिया जाए। ज्ञापन सौंपने के दौरान कमर चंद यादव, सुरेंद्र कुमार, सुषमा देवी, पवन कुमार, नितिन सिंह, मंजू देवी, रविंद्र कुमार और मोहन सिंह सहित अनेक प्रधानाचार्य मौजूद रहे।