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महिलाओं को बनाया ढाल, जंगलों से पहुंचती थी खेप: नशा तस्करों के नए नेटवर्क का खुलासा

इंट्रो

ड्रग्स तस्करी के खिलाफ पुलिस की लगातार सख्ती के बीच तस्करों ने अब अपराध को अंजाम देने के लिए नए और चौंकाने वाले तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं। पहले जहां नाबालिग बच्चों का इस्तेमाल किया जाता था, वहीं अब महिलाओं को तस्करी नेटवर्क का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है। राजस्थान के कोटा संभाग सहित कई क्षेत्रों में सामने आए मामलों ने पुलिस और जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हालिया कार्रवाई में ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें महिलाओं के जरिए जंगलों और ग्रामीण रास्तों से नशे की खेप एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाई जा रही थी।

पुलिस की सख्ती के बाद बदला तस्करों का तरीका

पिछले कुछ वर्षों में मादक पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने व्यापक अभियान चलाए हैं। लगातार बढ़ती नाकाबंदी, हाईवे चेकिंग और तकनीकी निगरानी के कारण तस्करों के पारंपरिक रास्ते प्रभावित हुए हैं। ऐसे में अपराधियों ने शक से बचने के लिए महिलाओं को नेटवर्क में शामिल करना शुरू कर दिया। उनका मानना था कि महिलाओं की तलाशी और जांच अपेक्षाकृत कम होती है, जिससे वे आसानी से पुलिस की नजरों से बचकर नशीले पदार्थों की सप्लाई कर सकती हैं। यही कारण है कि कई गिरोह अब महिला सदस्यों को प्राथमिकता देने लगे हैं।

जंगल और ग्रामीण रास्तों से पहुंचाई जा रही थी खेप

हाल के मामलों में सामने आया है कि तस्कर मुख्य सड़कों और हाईवे के बजाय जंगलों, कच्चे रास्तों और ग्रामीण क्षेत्रों का उपयोग कर रहे थे। महिलाओं को छोटे-छोटे समूहों में अलग-अलग मार्गों से भेजा जाता था ताकि पकड़े जाने की संभावना कम रहे। कई मामलों में महिलाओं को केवल सामान पहुंचाने का काम दिया जाता था, जबकि नेटवर्क का संचालन पर्दे के पीछे बैठे मुख्य सरगना करते थे। पुलिस का मानना है कि इस तरह के संगठित नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और इन्हें पकड़ना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

पांच वर्षों में दर्जनों महिला तस्कर गिरफ्तार

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार पिछले पांच वर्षों में राजस्थान, मध्यप्रदेश और पंजाब से जुड़े ड्रग्स तस्करी के करीब 50 मामलों में 38 महिलाओं की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें कुछ महिलाएं सीधे तस्करी में शामिल थीं, जबकि कुछ को लालच, आर्थिक मजबूरी या गिरोह के दबाव में इस काम में लगाया गया था। जांच एजेंसियों का कहना है कि कई मामलों में महिलाएं केवल कूरियर की भूमिका निभाती थीं, लेकिन कानून के अनुसार उनकी जिम्मेदारी भी उतनी ही मानी जाती है जितनी मुख्य आरोपियों की।

कोटा ग्रामीण पुलिस की कार्रवाई से खुला राज

हाल ही में कोटा ग्रामीण पुलिस ने एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया, जिसने तस्करों की नई रणनीति को उजागर कर दिया। जांच में सामने आया कि महिलाएं सुनसान और कम निगरानी वाले इलाकों से नशीले पदार्थों की खेप लेकर आती-जाती थीं। पुलिस ने कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसके बाद नेटवर्क की कार्यप्रणाली का खुलासा हुआ। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल वाहक ही नहीं, बल्कि पूरे गिरोह की पहचान कर उसके आर्थिक स्रोतों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

जांच एजेंसियों की बढ़ी चिंता, निगरानी और कड़ी

ड्रग्स तस्करी के बदलते तौर-तरीकों को देखते हुए पुलिस अब महिला तस्करों के इस्तेमाल को गंभीर चुनौती मान रही है। जांच एजेंसियां हाईवे के साथ-साथ ग्रामीण और वन क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ा रही हैं। इसके अलावा अंतरराज्यीय नेटवर्क पर नजर रखने के लिए विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय भी बढ़ाया गया है। अधिकारियों का मानना है कि तस्करी के इन नए तरीकों पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया, तो यह नेटवर्क और अधिक फैल सकता है।

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