दिल्ली होटल अग्निकांड में रियाजुद्दीन बने फरिश्ता, 2 लाख के गद्दे बिछाकर बचाई 8 लोगों की जान
दिल्ली के मालवीय नगर होटल अग्निकांड में जहां एक तरफ 21 लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की दर्दनाक खबर सामने आई, वहीं इस त्रासदी के बीच इंसानियत की एक मिसाल भी देखने को मिली। होटल के सामने गद्दों की दुकान चलाने वाले रियाजुद्दीन मंसूरी ने अपनी परवाह किए बिना लाखों रुपये के गद्दे और रजाइयां सड़क पर बिछाकर कई लोगों की जान बचा ली। आज हर तरफ इस नेक काम की चर्चा हो रही है।
होटल में मची थी चीख-पुकार
मालवीय नगर स्थित होटल में आग लगने के बाद देखते ही देखते पूरा भवन धुएं और आग की लपटों से घिर गया। ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोग मदद के लिए चीख-पुकार कर रहे थे। दमकल विभाग के पहुंचने से पहले हालात बेहद गंभीर हो चुके थे और कई लोगों के सामने इमारत से कूदने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।
रियाजुद्दीन ने लिया फौरन फैसला
होटल के सामने गद्दों का कारोबार करने वाले रियाजुद्दीन मंसूरी को जैसे ही आग लगने की सूचना मिली, वे अपने बेटे और कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बिना देर किए अपनी दुकान से करीब 20 से 25 गद्दे और रजाइयां निकालकर होटल के नीचे सड़क पर बिछा दीं।
कुछ ही मिनटों में उन्होंने गद्दों और रजाइयों की मदद से एक सुरक्षा कवच तैयार कर दिया, जिससे होटल में फंसे लोग नीचे कूदकर अपनी जान बचा सके।
8 लोगों की बची जान
रियाजुद्दीन के अनुसार दमकल विभाग के पहुंचने से पहले करीब 8 लोग होटल की ऊपरी मंजिलों से नीचे कूदे और गद्दों की वजह से सुरक्षित बच गए। कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं, लेकिन उनकी जान बच गई।
बचाव कार्य के दौरान रियाजुद्दीन और उनके बेटे को भी चोटें लगीं, लेकिन उन्होंने लोगों की मदद करना नहीं छोड़ा।
2 लाख रुपये का हुआ नुकसान
रियाजुद्दीन ने बताया कि इस पूरी कार्रवाई में उन्हें लगभग 2 लाख रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने सिर्फ गद्दे और रजाइयां ही नहीं दीं, बल्कि घायलों और मृतकों को बाहर निकालने के लिए चादरें और अन्य सामान भी उपलब्ध कराया।
उन्होंने कहा कि उस समय उनके लिए पैसों से ज्यादा लोगों की जान की कीमत थी।
“हिंदू-मुस्लिम से ऊपर इंसानियत”
रियाजुद्दीन ने कहा कि उन्होंने केवल इंसानियत के नाते यह काम किया। उनके शब्दों में, “हिंदू-मुसलमान से ऊपर इंसानियत है। हम सब हिंदुस्तानी हैं। जरूरतमंद लोगों की मदद करना मेरा फर्ज है।”
उन्होंने यह भी बताया कि अगर आग पर समय रहते काबू नहीं पाया जाता, तो उनकी दुकान भी आग की चपेट में आ सकती थी।
सोशल मीडिया पर हो रही सराहना
घटना के बाद रियाजुद्दीन की बहादुरी और मानवता की मिसाल सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। लोग उन्हें असली हीरो और फरिश्ता बता रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि यदि उन्होंने समय रहते यह फैसला नहीं लिया होता, तो मृतकों की संख्या और अधिक हो सकती थी।
इंसानियत की मिसाल बना यह कदम
एक ओर जहां हादसे ने कई परिवारों को गम दिया, वहीं रियाजुद्दीन की सूझबूझ और मानवता ने कई परिवारों को अपने प्रियजनों को सुरक्षित वापस पाने का मौका दिया। उनका यह साहसिक कदम आज इंसानियत की एक बड़ी मिसाल बन गया है।