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आसाराम को हाईकोर्ट से राहत,स्वास्थ्य बिगड़ने पर विशेष इलाज की अनुमति

नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से स्वास्थ्य संबंधी राहत मिली है। जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद आसाराम की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए अदालत ने जेल प्रशासन को समुचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जरूरत पड़ने पर उन्हें आयुर्वेद अस्पताल में उपचार की अनुमति देने का आदेश भी दिया गया है।

स्वास्थ्य को लेकर हाईकोर्ट का अहम निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति पर विचार करते हुए जेल प्रशासन को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि यदि स्वास्थ्य स्थिति गंभीर होती है तो उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि आवश्यकता पड़ने पर आयुर्वेदिक चिकित्सा संस्थान में उपचार कराया जा सकता है।

पुराने आदेशों की पालना पर हुई चर्चा

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी जानना चाहा कि पूर्व में जारी किए गए निर्देशों का पालन किस हद तक किया गया है। इससे पहले अदालत ने जेल प्रशासन को समय पर इलाज, आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए घर का बना एक समय का भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। राज्य सरकार और जेल प्रशासन से इन व्यवस्थाओं की स्थिति पर जवाब मांगा गया था।

अचानक बिगड़ी थी तबीयत

जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले जेल में आसाराम की तबीयत अचानक खराब हो गई थी, जिसके बाद उन्हें तत्काल चिकित्सा उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकीय निगरानी में उनका इलाज किया गया। इसी स्वास्थ्य स्थिति को आधार बनाकर अदालत में चिकित्सा सुविधाओं को लेकर याचिका पर सुनवाई हुई।

अंतरिम जमानत पर पहले लग चुकी है रोक

गौरतलब है कि स्वास्थ्य कारणों के आधार पर आसाराम को पूर्व में मिली अंतरिम जमानत को अदालत आगे बढ़ाने से इनकार कर चुकी है। करीब दो वर्षों तक समय-समय पर बढ़ाई जाती रही राहत पर रोक लगाते हुए अदालत ने स्पष्ट किया था कि गंभीर आपराधिक मामलों में न्यायिक प्रक्रिया और पीड़ित पक्ष के अधिकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

पीड़िता के अधिकारों पर अदालत की टिप्पणी

पूर्व सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा था कि ऐसे मामलों में न्याय केवल आरोपी के अधिकारों तक सीमित नहीं हो सकता। पीड़िता की गरिमा, सुरक्षा और न्याय की अपेक्षाओं को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। अदालत की इस टिप्पणी को मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह न्यायिक संतुलन और पीड़ित अधिकारों पर जोर देती है।

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