#देश दुनिया #पॉलिटिक्स #राज्य-शहर

‘सुप्रीम कोर्ट का कदम स्वागत योग्य’, अशोक गहलोत बोले- अरावली पर कमेटी से है बड़ी उम्मीद

नई दिल्ली/जयपुर। देश की सबसे प्राचीन पर्वतमाला अरावली के संरक्षण और उसकी वैज्ञानिक परिभाषा तय करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने अरावली से जुड़े विवादों को सुलझाने और इसके इकोसिस्टम की रक्षा के लिए एक 5 सदस्यीय हाई-पावर कमेटी का गठन किया है। इस फैसले पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने खुशी जताते हुए इसे ‘स्वागत योग्य’ बताया है। गहलोत ने कहा कि यह कमेटी अरावली के भविष्य को सुरक्षित करने में अहम भूमिका निभाएगी और हमें इससे बड़ी उम्मीदें हैं।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 5 सदस्यीय कमेटी का गठन

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मंगलवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। कोर्ट ने अरावली पर्वतमाला की सटीक परिभाषा तय करने और इससे जुड़े अन्य अहम मुद्दों की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई है। इस कमेटी को 31 अगस्त से पहले अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सौंपनी होगी। इसके बाद 7 सितंबर को मामले की अगली सुनवाई होगी। यह कदम अरावली क्षेत्र में हो रही अवैध खनन और पहाड़ों की कटाई को रोकने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

गहलोत का बयान: बदलते जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखे कमेटी

अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज राजस्थान और पूरा देश भीषण गर्मी और मौसम की विकट परिस्थितियों से जूझ रहा है। ऐसे समय में अरावली को सुरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बचाना बेहद जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक या दो दशक पहले के मापदंड आज की गंभीर जलवायु परिस्थितियों (Climate Change) के अनुकूल नहीं हो सकते। इसलिए, कमेटी को वर्तमान पर्यावरणीय संकट को ध्यान में रखते हुए ही अरावली की वैज्ञानिक परिभाषा तैयार करनी चाहिए ताकि इसका इकोसिस्टम पूरी तरह सुरक्षित रह सके।

केंद्र सरकार पर निशाना: नीतियों ने खड़ा किया संकट

अपने बयान में अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार की पर्यावरण नीतियों पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने लिखा कि केंद्र की ढील नीतियों ने अरावली के अस्तित्व के सामने गहरा संकट खड़ा कर दिया था, जिसके बाद ‘अरावली बचाओ’ मुहिम को जनस्तर पर भारी समर्थन मिला। गहलोत ने विश्वास जताया कि अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित इस कमेटी के प्रयासों से लघु पहाड़ियों का संरक्षण संभव होगा और अरावली का यह प्राकृतिक सुरक्षा कवच फिर से मजबूत बनेगा। उन्होंने कहा कि अरावली सिर्फ राजस्थान की नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत की जलवायु स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

नागरिकों से अपील: कमेटी को दें बहुमूल्य सुझाव

अशोक गहलोत ने इस मौके पर सभी पर्यावरणविदों, स्थानीय समुदायों और सजग नागरिकों से एक विनम्र अपील की है। उन्होंने कहा कि जब भी यह हाई-पावर कमेटी सुझाव आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू करे, तो हर नागरिक को अपने बहुमूल्य सुझाव अवश्य दर्ज कराने चाहिए। गहलोत का मानना है कि अरावली का संरक्षण केवल सरकार या अदालतों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज के हर वर्ग की साझा जिम्मेदारी है। स्थानीय लोगों की भागीदारी और उनके सुझाव इस कमेटी की रिपोर्ट को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाने में मदद करेंगे।

अरावली संकट: अनियंत्रित खनन और पर्यावरणीय क्षति

अरावली पर्वतमाला पिछले कई वर्षों से अनियंत्रित खनन, अवैध निर्माण और पेड़ों की कटाई के कारण गंभीर संकट का शिकार है। विशेषज्ञों का कहना है कि अरावली की ऊंचाई और क्षेत्रफल लगातार घट रहा है, जिसका सीधा असर राजस्थान और दिल्ली-NCR के जल स्तर और तापमान पर पड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित यह कमेटी इन सभी पहलुओं की गहन जांच करेगी। इस कदम को पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय निवासियों द्वारा लंबे समय से मांगी जा रही राहत के रूप में देखा जा रहा है, जो अरावली की प्राकृतिक धरोहर को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने में मददगार साबित होगा।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *