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भीलवाड़ा के माण्डलगढ़ दुर्ग की पहाड़ियों में भीषण आग, आबादी तक पहुंचीं लपटें; प्रशासनिक तैयारियों पर उठे सवाल

भीलवाड़ा जिले के ऐतिहासिक माण्डलगढ़ क्षेत्र में पहाड़ी जंगलों में लगी भीषण आग ने देर रात पूरे इलाके में दहशत फैला दी। आग तेजी से फैलते हुए आबादी क्षेत्र के करीब पहुंच गई, जिसके बाद स्थानीय लोग खुद जान जोखिम में डालकर आग बुझाने में जुट गए। घटना ने प्रशासनिक तैयारियों और दमकल संसाधनों की कमी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

देर रात जंगल में भड़की आग से मचा हड़कंप

माण्डलगढ़ दुर्ग और मुख्य आबादी क्षेत्र के बीच स्थित पहाड़ियों में देर रात अचानक आग लग गई। सुबह करीब चार बजे लोगों ने ऊंची उठती लपटें और धुएं का गुबार देखा तो पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग सूखी झाड़ियों और तेज हवाओं के कारण तेजी से फैलती चली गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और आसपास की बस्तियों की ओर बढ़ने लगी। स्थानीय लोगों में भय का माहौल बन गया और कई परिवार घरों से बाहर निकल आए।

दमकल संसाधनों की कमी बनी बड़ी चुनौती

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन आग बुझाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होने से राहत कार्य प्रभावित हुआ। मौके पर भेजा गया छोटा दमकल वाहन आग की तीव्रता के सामने बेअसर साबित हुआ। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उपखंड मुख्यालय होने के बावजूद माण्डलगढ़ में बड़ा और आधुनिक दमकल वाहन उपलब्ध नहीं है। इसी कारण आग पर शुरुआती दौर में काबू नहीं पाया जा सका और हालात लगातार बिगड़ते गए।

स्थानीय लोगों ने संभाला मोर्चा

दमकल की सीमित क्षमता के बीच स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने खुद मोर्चा संभाल लिया। लोग घरों से पानी की बाल्टियां भरकर पहाड़ी इलाके तक पहुंचे और आग बुझाने की कोशिश करते रहे। कई लोग घंटों तक धुएं और गर्मी के बीच आग को आबादी तक पहुंचने से रोकने में जुटे रहे। पुलिस की मौजूदगी में राहत प्रयास जारी रहे, लेकिन आग का दायरा लगातार बढ़ता रहा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पर्याप्त संसाधन नहीं पहुंचे तो बड़ा नुकसान हो सकता था।

प्रशासनिक तैयारियों पर उठे सवाल

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में हर साल आगजनी की घटनाएं होती हैं, इसके बावजूद दमकल और आपदा प्रबंधन को लेकर स्थायी इंतजाम नहीं किए गए। नागरिकों ने सवाल उठाया कि ऐतिहासिक और संवेदनशील क्षेत्र होने के बावजूद यहां पर्याप्त अग्निशमन संसाधन क्यों उपलब्ध नहीं कराए गए। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार मांग उठाने के बाद भी प्रशासन ने इस ओर गंभीरता नहीं दिखाई।

वन संपदा और ऐतिहासिक क्षेत्र को नुकसान की आशंका

आग से पहाड़ी क्षेत्र की वन संपदा को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। माण्डलगढ़ दुर्ग के आसपास फैले जंगलों में लगी आग ने पर्यावरणीय चिंता भी बढ़ा दी है। फिलहाल प्रशासन और स्थानीय टीमें आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाने के प्रयास में जुटी हुई हैं। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि आग दोबारा फैलने की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

लोगों ने स्थायी समाधान की उठाई मांग

घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने माण्डलगढ़ में आधुनिक दमकल वाहन और स्थायी फायर स्टेशन की मांग तेज कर दी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए तो भविष्य में और बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन से पहाड़ी और वन क्षेत्रों में सुरक्षा उपाय मजबूत करने की भी मांग की जा रही है।

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