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अजमेर में रिश्तों का खूनी अंत: पिता की हत्या के बाद बेटे ने रची आग की साजिश, बहन और मां भी शामिल

अजमेर जिले के बोराड़ा क्षेत्र में पूर्व सरपंच परिवार के चार लोगों की मौत का मामला अब एक खौफनाक हत्याकांड में बदल चुका है। शुरुआत में कार में आग लगने से हादसा माना जा रहा यह मामला पुलिस जांच में सुनियोजित सामूहिक हत्या निकला। पुलिस के अनुसार, इस वारदात का मास्टरमाइंड परिवार का नाबालिग बेटा था, जिसने संपत्ति विवाद और पारिवारिक तनाव के चलते अपनी मां और बहन के साथ मिलकर चार लोगों की हत्या कर दी।

पांच महीने तक तैयार होती रही हत्या की साजिश

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी नाबालिग पिछले कई महीनों से हत्या की योजना बना रहा था। परिवार के भीतर संपत्ति को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा था। आरोपी को डर था कि पिता की दूसरी पत्नी और भांजी परिवार की संपत्ति पर कब्जा कर सकती हैं। इसी नाराजगी और मानसिक तनाव के चलते उसने पूरे घटनाक्रम की बारीकी से योजना बनाई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने हत्या को हादसा साबित करने के लिए पहले से पूरी तैयारी कर रखी थी, ताकि किसी को उस पर शक न हो।

रात के सन्नाटे में पिता की हत्या

घटना वाली रात परिवार के सभी सदस्य फार्म हाउस पर मौजूद थे। पुलिस के मुताबिक देर रात तक आरोपी मोबाइल पर गेम खेलता रहा और सभी के सोने का इंतजार करता रहा। रात करीब दो बजे वह चुपचाप पिता के कमरे में पहुंचा और उन पर चाकू से हमला कर दिया। हमला इतना घातक था कि पिता को संभलने तक का मौका नहीं मिला। पुलिस का कहना है कि आरोपी ने वार इस तरह किया ताकि कोई शोर न हो और बाकी लोग जाग न सकें।

चीख सुनकर जागीं महिलाएं, फिर चार हत्याएं

पुलिस जांच के अनुसार, हमले के दौरान दूसरी पत्नी की आंख खुल गई और उसने विरोध करने की कोशिश की। इसके बाद आरोपी की मां और बहन भी कमरे में पहुंच गईं। तीनों ने मिलकर महिला पर हमला कर उसकी हत्या कर दी। शोर सुनकर घर की बुजुर्ग महिला और भांजी भी वहां पहुंचीं, लेकिन आरोपी परिवार ने उन्हें भी जिंदा नहीं छोड़ा। कुछ ही मिनटों में कमरे में चार लोगों की लाशें बिछ गईं। पुलिस का कहना है कि पूरा घटनाक्रम बेहद निर्ममता के साथ अंजाम दिया गया।

संपत्ति और ‘तिजोरी की चाबी’ बना हत्या का कारण

जांच में यह भी सामने आया कि परिवार की भांजी महिमा घर के आर्थिक और जमीन से जुड़े मामलों को संभालती थी। बैंक खातों और लेन-देन का जिम्मा भी उसी के पास था। आरोपी परिवार को शक था कि संपत्ति पर उनका अधिकार कमजोर किया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, इसी वजह से महिमा आरोपी परिवार के निशाने पर थी। तफ्तीश में सामने आया है कि परिवार के भीतर लंबे समय से अविश्वास और तनाव का माहौल था, जिसने आखिरकार इस खूनी वारदात का रूप ले लिया।

हादसा दिखाने के लिए कार में लगाई आग

चारों हत्याओं के बाद आरोपियों ने सबूत मिटाने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, शवों को स्कॉर्पियो कार में रखकर फार्म हाउस से कुछ दूरी पर ले जाया गया। वहां वाहन में ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी गई ताकि मामला सड़क हादसा या शॉर्ट सर्किट जैसा लगे। लेकिन पुलिस को घटनास्थल और आरोपियों के व्यवहार पर शक हुआ। जांच के दौरान कई विरोधाभास सामने आए, जिसके बाद पूरी साजिश का खुलासा हुआ।

आरोपी का व्यवहार देख पुलिस को हुआ शक

घटना के बाद आरोपी परिवार सामान्य व्यवहार करता नजर आया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, नाबालिग बेटे का शांत रहना और घटना के बाद सामान्य तरीके से बैठकर चाय पीना जांच टीम को संदिग्ध लगा। इसके बाद जब पूछताछ और तकनीकी जांच आगे बढ़ी तो पूरे हत्याकांड की परतें खुलती चली गईं। पुलिस अब मामले में सभी पहलुओं की जांच कर रही है और आरोपियों से लगातार पूछताछ जारी है।

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