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युवाओं में तेजी से फैल रही वेपिंग की लत: स्टाइल नहीं, बन रही ‘धीमा जहर’

आधुनिकता और स्टाइल के नाम पर युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रही ई-सिगरेट यानी वेपिंग अब गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। स्वाद और आकर्षण के नाम पर शुरू हुई यह आदत धीरे-धीरे खतरनाक लत में बदल रही है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि भारत में ई-सिगरेट पूरी तरह प्रतिबंधित होने के बावजूद इसका इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह केवल फैशन नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है।

युवाओं में तेजी से बढ़ रहा वेपिंग का चलन

हाल के अध्ययनों और स्वास्थ्य रिपोर्ट्स के अनुसार, बड़ी संख्या में युवा ई-सिगरेट की ओर आकर्षित हो रहे हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि शिक्षित युवाओं का एक बड़ा वर्ग कभी न कभी वेपिंग आजमा चुका है, जबकि लाखों किशोर भविष्य में इसे इस्तेमाल करने के प्रति संवेदनशील माने जा रहे हैं। स्कूल और कॉलेज स्तर तक यह लत तेजी से पहुंच रही है। कई जगह छात्र यूएसबी जैसे दिखने वाले छोटे वेप डिवाइस का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिन्हें शिक्षक और अभिभावक आसानी से पहचान भी नहीं पाते। विशेषज्ञ इसे आने वाले समय का बड़ा पब्लिक हेल्थ संकट मान रहे हैं।

भारत में प्रतिबंध के बावजूद जारी है काला कारोबार

भारत सरकार ने वर्ष 2019 में ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून लागू किया था। इस कानून के तहत ई-सिगरेट का उत्पादन, बिक्री, विज्ञापन और स्टोरेज पूरी तरह गैरकानूनी है। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है। इसके बावजूद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और गुप्त बाजारों के जरिए यह कारोबार लगातार जारी है। कई राज्यों में पुलिस कार्रवाई के दौरान लाखों रुपये की ई-सिगरेट जब्त होने के मामले सामने आ चुके हैं। बिना उम्र जांच के युवाओं तक इसकी पहुंच चिंता का बड़ा कारण बनती जा रही है।

शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ई-सिगरेट में मौजूद निकोटीन अत्यधिक नशे की लत पैदा करता है। किशोरावस्था में दिमाग पूरी तरह विकसित नहीं होता, ऐसे में इसका असर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर पड़ता है। वेपिंग से फेफड़ों की बीमारी, सांस लेने में परेशानी, खांसी और अस्थमा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर हृदय रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ता है। डॉक्टरों का कहना है कि वेपिंग चिंता, तनाव, डिप्रेशन और ध्यान की कमी जैसी मानसिक समस्याओं को भी बढ़ावा देती है।

फ्लेवर और ट्रेंड के जरिए युवाओं को बनाया जा रहा निशाना

विशेषज्ञों का कहना है कि ई-सिगरेट कंपनियां युवाओं को आकर्षित करने के लिए चॉकलेट, मिंट, फ्रूट और कैंडी जैसे फ्लेवर इस्तेमाल करती हैं। शुरुआत में इसे “सुरक्षित विकल्प” बताकर पेश किया जाता है, जिससे युवा आसानी से इसके जाल में फंस जाते हैं। सोशल मीडिया पर इसे स्टाइल और आधुनिकता का प्रतीक बनाकर प्रचारित किया जाता है। धीरे-धीरे यह आदत निकोटीन की गंभीर लत में बदल जाती है, जिससे युवाओं का ध्यान पढ़ाई, करियर और लक्ष्य से भटकने लगता है।

पुलिस और डॉक्टरों की अपील: नशे से दूर रहें युवा

राजस्थान पुलिस और स्वास्थ्य विभाग लगातार युवाओं को जागरूक करने के लिए अभियान चला रहे हैं। “नशे से दूर रहो, भविष्य संवारो” जैसे संदेशों के जरिए युवाओं को वेपिंग और अन्य नशे से बचने की अपील की जा रही है। पुलिस ने लोगों से कहा है कि ई-सिगरेट के अवैध कारोबार की सूचना तुरंत प्रशासन को दें। वहीं डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि ई-सिगरेट कोई सुरक्षित विकल्प नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को निकोटीन की गिरफ्त में धकेलने वाला खतरनाक जाल है। विशेषज्ञों के मुताबिक समय रहते जागरूकता और सख्त कार्रवाई ही इस बढ़ती समस्या को रोक सकती है।

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