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राजस्थान भाजपा में अंदरूनी कलह: मिर्धा-किलक के बीच छिड़ी घोटाले की जंग

नागौर में पोषाहार घोटाले पर भिड़े रिछपाल मिर्धा और अजय सिंह किलक, एक-दूसरे पर लगाए गंभीर आरोप, भाजपा में मची सियासी हलचल।

शब्दों की जंग: मिर्धा बोले- किलक नंबर वन चोर

नागौर में राजनीति का पारा चरम पर है। भाजपा नेता एवं पूर्व विधायक रिछपाल मिर्धा ने डेगाना विधायक अजय सिंह किलक पर जमकर हमला बोला है। मिर्धा ने किलक को ‘एक नंबर का चोर और घोटालेबाज’ करार दिया है। उनका आरोप है कि करीब आठ साल पुराने पोषाहार घोटाले में किलक की संलिप्तता साबित है, फिर भी उनकी गिरफ्तारी नहीं हो रही। मिर्धा ने सवाल उठाया कि एसीबी ने 18 लोगों को पकड़ा, लेकिन किलक बचे हुए हैं। क्या कोई ताकत उन्हें बचा रही है? यह सवाल अब राजस्थान की सियासत में गूंज रहा है।

40 करोड़ का पोषाहार घोटाला: एसीबी की कार्रवाई और नए सवाल

एसीबी ने हाल ही में 40 करोड़ रुपये के पोषाहार घोटाले में 18 लोगों को गिरफ्तार किया है। रिछपाल मिर्धा का दावा है कि एक आरोपी ने बयान दिया है कि किलक के साले और ससुर मंथली वसूलते थे। उस समय वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री थीं और किलक बच गए। मिर्धा ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने भी सबूत रखे हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही। वे सवाल करते हैं कि इतने बड़े घोटाले में आरोपी विधायक की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? क्या राज्य सरकार में कोई उनका ‘आका’ है? ये सवाल जांच एजेंसियों और सरकार दोनों के लिए चुनौती बन गए हैं।

बेनामी संपत्ति के आरोप: किलक पर जमीन घोटाले का भी इल्जाम

रिछपाल मिर्धा ने अजय सिंह किलक पर केवल पोषाहार घोटाले का ही नहीं, बल्कि जमीन घोटाले का भी आरोप लगाया है। मिर्धा का दावा है कि किलक ने मानसरोवर में एक एससी वर्ग की जमीन खरीदी, जिसकी कीमत एक करोड़ रुपये थी, लेकिन उन्होंने केवल 10 लाख रुपये ही अदा किए और बाकी 90 लाख रुपये हड़प लिए। इस जमीन को किलक ने अपने भाई के नाम कर रखा है। मिर्धा ने आरोप लगाया कि किलक के पास करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति है और उनकी संपत्तियों की जांच होनी चाहिए। ये गंभीर आरोप यदि साबित हुए, तो यह मामला और भी पेचीदा हो सकता है।

किलक का पलटवार: मिर्धा को बताया ‘पुराना ड्राइवर’, मांगी जांच

अजय सिंह किलक ने रिछपाल मिर्धा के आरोपों का करारा जवाब दिया है। किलक ने मिर्धा को ‘पुराना ड्राइवर’ बताते हुए उनकी संपत्तियों की जांच की मांग की है। उन्होंने खुद को पाक साफ करार दिया और कहा कि मिर्धा के आरोप निराधार और राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित हैं। किलक का कहना है कि यदि उनके खिलाफ कोई सबूत है, तो कानून के तहत कार्रवाई हो, लेकिन झूठे आरोप लगाकर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। दोनों नेताओं के बीच शब्दों की मर्यादा टूट चुकी है और यह विवाद अब भाजपा के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है।

भाजपा के लिए चुनौती: अंदरूनी कलह का असर चुनावी रणनीति पर

मिर्धा और किलक के बीच यह टकराव राजस्थान भाजपा के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर रहा है। नागौर जैसे महत्वपूर्ण जिले में दो प्रभावशाली नेताओं का आमने-सामने होना पार्टी की एकजुटता पर सवाल उठाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह विवाद नहीं सुलझा, तो इसका असर आगामी चुनावों में वोट बैंक पर पड़ सकता है। पार्टी हाईकमान को जल्द हस्तक्षेप करना होगा और दोनों पक्षों को सुनकर निष्पक्ष निर्णय लेना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर नेताओं के बीच मतभेद राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की छवि को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए इस मामले को गंभीरता से लेना आवश्यक है।

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