पोषाहार की दाल में मरा चूहा मिलने पर कार्रवाई, नंगली स्कूल के संस्था प्रधान एपीओ
अलवर जिले के रामगढ़ क्षेत्र के अलावड़ा स्थित नंगली गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में 27 अप्रैल को बच्चों के पोषाहार की दाल में मरा हुआ चूहा मिलने का मामला अब विभागीय कार्रवाई तक पहुंच गया है। जांच पूरी होने से पहले ही शिक्षा विभाग ने विद्यालय के संस्था प्रधान कुंदन लाल मीणा को एपीओ कर मुख्यालय कठूमर भेज दिया है। विभाग ने प्रथम दृष्टया उन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
घटना के अगले दिन प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र सिंह और मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) विश्राम गोस्वामी ने विद्यालय पहुंचकर जांच की। जांच में पाया गया कि विद्यालय के बाहर चल रहे नाली निर्माण कार्य के कारण सफाई व्यवस्था प्रभावित थी। इसके अलावा रिकॉर्ड संधारण में भी अनियमितताएं सामने आईं। इन्हीं आधारों पर जांच लंबित रहते हुए संस्था प्रधान के खिलाफ कार्रवाई की गई।
अलावड़ा राजकीय महात्मा गांधी विद्यालय के प्रधानाचार्य सतपाल सिंह ने बताया कि उनके अधीन चार विद्यालय आते हैं और वे नियमित निरीक्षण करते रहे हैं, जहां पहले कभी कोई गंभीर कमी सामने नहीं आई। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य के चलते सफाई व्यवस्था जरूर प्रभावित हुई, लेकिन उच्च अधिकारियों के आदेशों की पालना करना आवश्यक है।
जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) देवेंद्र सिंह के अनुसार विद्यालय का रिकॉर्ड सही तरीके से संधारित नहीं पाया गया। एक ही व्यक्ति द्वारा प्रधानाध्यापक और पोषाहार जांचकर्ता के रूप में हस्ताक्षर किए जा रहे थे, वहीं सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरे हुए चूहे के मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष पर विभाग नहीं पहुंचा है।
सीबीईओ विश्राम गोस्वामी ने कहा कि उच्च अधिकारियों की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर ही संस्था प्रधान के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।
उल्लेखनीय है कि विद्यालय में क्यूआरजी फाउंडेशन एनजीओ के माध्यम से पोषाहार उपलब्ध कराया जाता है। घटना के दिन विद्यालय प्रबंधन समिति ने दाल में मरा चूहा मिलने के बाद एहतियातन बच्चों को भोजन वितरित नहीं किया और तुरंत उच्च अधिकारियों को सूचना देकर पोषाहार वितरण रुकवा दिया गया।
हालांकि, ग्रामीणों और कुछ शिक्षकों के बीच यह चर्चा भी है कि मामले की पूरी जिम्मेदारी तय होने से पहले ही संस्था प्रधान पर कार्रवाई कर दी गई, जबकि पोषाहार आपूर्ति करने वाली संस्था की भूमिका की जांच अभी जारी है।