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बिजली निगमों के निजीकरण पर बवाल: कर्मचारियों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

अलवर में बिजली निगमों के निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों का विरोध तेज हो गया है। राजस्थान विद्युत श्रमिक महासंघ के नेतृत्व में कर्मचारियों ने ज्ञापन सौंपकर सरकार को चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।

ज्ञापन देकर जताया विरोध

मंगलवार को उमरैण स्थित जयपुर विद्युत वितरण कार्यालय में कर्मचारियों ने सहायक अभियंता को ज्ञापन सौंपा। जिला महामंत्री धीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में कर्मचारियों ने ऊर्जा विभाग के शासन सचिव का ध्यान निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाने और लंबित मांगों के समाधान की ओर आकर्षित किया।

पुरानी सहमति लागू न होने से नाराजगी

कर्मचारियों का कहना है कि 12 अगस्त 2025 को ऊर्जा मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में कई मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन अब तक उन पर अमल नहीं किया गया। इससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष है। संगठन का आरोप है कि सरकार लगातार निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिससे कर्मचारियों का भरोसा टूट रहा है।

निजीकरण से भविष्य पर खतरे की आशंका

विशेष रूप से जोधपुर डिस्कॉम के निजीकरण को लेकर कर्मचारियों में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि इससे हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। कर्मचारियों ने इसे जनहित और रोजगार दोनों के लिए नुकसानदायक बताया है।

पहले भी उठा चुके हैं आवाज

संगठन ने बताया कि 26 दिसंबर 2025 को आयोजित श्रमिक आक्रोश रैली में मुख्यमंत्री को समस्याओं से अवगत कराया गया था। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इस कारण कर्मचारियों का विरोध और अधिक तेज होता जा रहा है।

चरणबद्ध आंदोलन की दी चेतावनी

महासंघ ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 6 मई 2026 को जिला स्तर पर और 20 मई को डिस्कॉम मुख्यालय स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो 10 जून को विद्युत भवन पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। संगठन ने कहा कि किसी भी औद्योगिक अशांति की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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