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लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक नहीं हो सका पारित, विपक्ष ने बताया लोकतंत्र की जीत

लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक आवश्यक बहुमत के अभाव में पारित नहीं हो सका। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की जीत बताया, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है।

राहुल गांधी का बयान:

‘संविधान पर हमला रोक दिया’
लोकसभा में विधेयक गिरने के बाद नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव महिलाओं को अधिकार देने के बजाय राजनीतिक ढांचे को बदलने का प्रयास था। राहुल गांधी ने इसे संविधान के खिलाफ बताया और कहा कि विपक्ष ने मिलकर इसे रोककर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि सरकार वास्तविक महिला आरक्षण लागू करना चाहती है तो पूर्व में पारित ढांचे को लागू करे, जिसमें विपक्ष पूरा सहयोग देगा।

प्रियंका गांधी का रुख: ‘यह सिर्फ आरक्षण नहीं, लोकतंत्र का सवाल’

कांग्रेस सांसद Priyanka Gandhi Vadra ने इस मुद्दे को व्यापक लोकतांत्रिक संदर्भ में रखा। उन्होंने कहा कि यह केवल महिला आरक्षण का मामला नहीं था, बल्कि देश की लोकतांत्रिक संरचना और अखंडता से जुड़ा प्रश्न था। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि विधेयक को परिसीमन और पुरानी जनगणना से जोड़ना उचित नहीं था, खासकर जब उसमें ओबीसी वर्ग का समुचित प्रतिनिधित्व शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे स्वरूप में इस बिल का पारित होना संभव नहीं था।

सरकार को नहीं मिला दो-तिहाई बहुमत

लोकसभा में इस संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका। मतदान के दौरान 298 सांसदों ने समर्थन में जबकि 230 ने विरोध में वोट दिया। सदन की अध्यक्षता कर रहे Om Birla ने स्पष्ट किया कि आवश्यक संख्या बल के अभाव में विधेयक आगे की प्रक्रिया में नहीं बढ़ सका और प्रारंभिक स्तर पर ही अस्वीकृत हो गया।

आगे की विधायी प्रक्रिया भी रुकी

इस घटनाक्रम के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने संकेत दिया कि इससे जुड़े अन्य विधेयकों को भी फिलहाल आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इससे यह साफ हो गया कि महिला आरक्षण को लेकर फिलहाल संसद में कोई त्वरित प्रगति नहीं होगी। इस मुद्दे पर आने वाले समय में राजनीतिक सहमति बनना जरूरी होगा, ताकि व्यापक समर्थन के साथ कोई ठोस निर्णय लिया जा सके।

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