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दिल्ली के रोहिणी में भीषण आग: झुग्गियों में सोते परिवार पर कहर, पति-पत्नी और मासूम की दर्दनाक मौत

राजधानी दिल्ली के रोहिणी इलाके में देर रात लगी भीषण आग ने दिल दहला देने वाली त्रासदी को जन्म दे दिया। आग की चपेट में आकर एक ही परिवार के तीन लोगों—पति, पत्नी और दो साल की मासूम बच्ची—की जिंदा जलकर मौत हो गई। आधा दर्जन से अधिक झुग्गियां जलकर राख हो गईं। यह हादसा न सिर्फ लापरवाही की ओर इशारा करता है, बल्कि घनी आबादी वाले इलाकों में सुरक्षा इंतजामों की गंभीर कमी को भी उजागर करता है।

देर रात सोते लोगों पर टूटा आग का कहर

घटना देर रात उस समय हुई जब अधिकांश लोग गहरी नींद में थे। अचानक एक झुग्गी से उठी आग ने देखते ही देखते आसपास की कई झुग्गियों को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी मच गई और हर तरफ चीख-पुकार सुनाई देने लगी। कई लोग जान बचाकर बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन एक परिवार के तीन सदस्य आग में फंस गए और बाहर नहीं निकल सके।

प्लास्टिक कबाड़ बना आग का बड़ा कारण

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जिस प्लॉट में आग लगी, वहां बड़ी मात्रा में प्लास्टिक का कबाड़ जमा था। इसी के बीच झुग्गियां बनाई गई थीं, जिससे आग ने बेहद खतरनाक रूप ले लिया। प्लास्टिक जैसे ज्वलनशील पदार्थों ने आग को और भड़का दिया, जिससे लपटें तेजी से फैलती चली गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे असुरक्षित भंडारण और अवैध ढांचे आग की घटनाओं को और गंभीर बना देते हैं।

एक ही परिवार खत्म, बाहर निकलने का नहीं मिला मौका

इस हृदयविदारक हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। मृतकों में पति, पत्नी और उनकी दो साल की मासूम बच्ची शामिल हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग इतनी भीषण थी कि तीनों को संभलने या बाहर निकलने का कोई अवसर नहीं मिला। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है और लोगों की आंखें नम हैं।

दमकल की मशक्कत के बाद आग पर काबू

सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई टीमें मौके पर पहुंचीं, लेकिन संकरी गलियों के कारण राहत कार्य में काफी दिक्कतें आईं। बड़ी दमकल गाड़ियां घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकीं, जिससे आग बुझाने में समय लगा। इसके बावजूद दमकल कर्मियों ने कड़ी मेहनत करते हुए आग पर काबू पाया। आग बुझने के बाद मलबे से तीनों शव बरामद किए गए, जिन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

जांच जारी, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

फिलहाल आग लगने के सटीक कारणों की जांच की जा रही है। मौके पर पुलिस, दमकल, कैट्स एम्बुलेंस और बिजली विभाग की टीमें मौजूद हैं। यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि घनी आबादी वाले इलाकों में सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं हो रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे क्षेत्रों में फायर सेफ्टी उपायों को सख्ती से लागू करना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं से बचा जा सके।

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