#पॉलिटिक्स #राज्य-शहर

लोकसभा सीटें 850 तक बढ़ाने की तैयारी: परिसीमन और महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में बड़ा कदम

केंद्र सरकार भारतीय लोकतंत्र में व्यापक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ते हुए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 लाने की तैयारी में है। इस प्रस्ताव के जरिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने, निर्वाचन क्षेत्रों का नया परिसीमन करने और महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण जल्द लागू करने का रास्ता तैयार किया जा रहा है। यह कदम देश की बदलती जनसंख्या और सामाजिक संरचना के अनुरूप प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लोकसभा सीटों में बड़े विस्तार का प्रस्ताव

विधेयक का सबसे प्रमुख बिंदु लोकसभा की कुल सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि है। प्रस्तावित संशोधन के तहत राज्यों से चुने जाने वाले सदस्यों की संख्या 815 तक और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अधिकतम 35 सीटों का प्रावधान किया गया है। इस प्रकार लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 850 तक पहुंच सकती है। सरकार का मानना है कि वर्तमान जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए यह बदलाव आवश्यक है, जिससे तेजी से बढ़ती आबादी वाले क्षेत्रों को पर्याप्त राजनीतिक भागीदारी मिल सके।

परिसीमन प्रक्रिया को फिर से सक्रिय करने की पहल

इस विधेयक के जरिए लंबे समय से स्थगित परिसीमन प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके लिए संविधान के संबंधित प्रावधानों में संशोधन कर 2026 के बाद की जनगणना का इंतजार करने की बाध्यता को हटाने की योजना है। सरकार नवीनतम उपलब्ध जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन करना चाहती है, ताकि वर्तमान जनसांख्यिकीय स्थिति के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।

नए परिसीमन आयोग का गठन और कार्यप्रणाली

विधेयक के तहत एक नए परिसीमन आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है, जिसकी अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश करेंगे। इसके साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त या उनके प्रतिनिधि को आयोग में शामिल किया जाएगा। यह आयोग लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों का पुनर्समायोजन, निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण और जनसंख्या के आधार पर संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगा। आयोग की सिफारिशें अंतिम होंगी और उन्हें न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकेगी।

जनसंख्या की परिभाषा में बदलाव

विधेयक में “जनसंख्या” की संवैधानिक परिभाषा को भी संशोधित करने का प्रस्ताव है। अब यह परिभाषा उस जनगणना पर आधारित होगी जिसे संसद कानून के माध्यम से मान्यता दे और जिसके आंकड़े आधिकारिक रूप से प्रकाशित हो चुके हों। इससे भविष्य में परिसीमन और सीट आवंटन की प्रक्रिया अधिक लचीली और समयानुकूल हो सकेगी। यह बदलाव नीति निर्माण को अधिक व्यावहारिक और वास्तविक आंकड़ों पर आधारित बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

अनुसूचित जाति-जनजाति प्रतिनिधित्व पर विशेष ध्यान

विधेयक में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के प्रतिनिधित्व को सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। खासकर पूर्वोत्तर राज्यों में एसटी समुदायों के अनुपात और उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए सीटों का पुनर्समायोजन किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परिसीमन के बाद भी इन समुदायों की भागीदारी कम न हो और उनका राजनीतिक सशक्तिकरण बरकरार रहे।

महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया तेज

महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण को जल्द लागू करने के लिए भी इस विधेयक में महत्वपूर्ण संशोधन प्रस्तावित हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के तहत आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जोड़ा गया था, जिससे इसमें देरी की आशंका थी। अब नए प्रावधान के तहत नवीनतम प्रकाशित जनगणना आंकड़ों के आधार पर परिसीमन होते ही महिला आरक्षण लागू किया जा सकेगा, जिससे इसकी प्रक्रिया में तेजी आएगी।

राजनीतिक और लोकतांत्रिक प्रभाव

यह विधेयक केवल सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह देश के राजनीतिक ढांचे में व्यापक बदलाव का संकेत देता है। बदलती जनसंख्या, शहरीकरण और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह पहल लोकतंत्र को अधिक समावेशी और प्रतिनिधिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में इसका असर राष्ट्रीय और राज्य स्तर की राजनीति पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *