रात का खूनी खेल: सीरियल किलर ने 22 लोगों को बनाया शिकार
उत्तर प्रदेश के गांवों में एक समय ऐसा खौफ पसरा था, जब रात होते ही लोग घरों में कैद हो जाते थे। वजह था सीरियल किलर Sadashiv Sahu, जो अंधेरे का फायदा उठाकर सोते हुए लोगों को निशाना बनाता था। इस खौफनाक सिलसिले में उसने 22 लोगों की हत्या कर पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी
दिन में धार्मिक, रात में बन जाता था कातिल
सदाशिव साहू की सबसे खतरनाक बात यह थी कि दिन के समय वह एक सामान्य और धार्मिक व्यक्ति की तरह जीवन जीता था। गांव में पूजा-पाठ करता, लोगों से घुलमिलकर रहता, लेकिन रात होते ही उसका असली चेहरा सामने आ जाता। वह भरवा बंदूक लेकर निकलता और बेखौफ होकर अपने शिकार की तलाश करता। किसी को अंदाजा तक नहीं था कि उनके बीच रहने वाला यह व्यक्ति इतना खतरनाक हो सकता है।
आधी रात का सन्नाटा और एक गोली में खत्म कहानी
हत्या का उसका तरीका बेहद खौफनाक और सटीक था। आधी रात के सन्नाटे में वह घरों के बाहर या सोते हुए लोगों को निशाना बनाता। एक ही गोली चलती और सब कुछ खत्म हो जाता। न चीखने का मौका मिलता, न बचने का। रायबरेली और सुल्तानपुर की सीमा से लगे गांवों में लोग हर सुबह इस डर के साथ उठते थे कि कहीं अगला नंबर उनका या उनके किसी अपने का न हो।
विश्राम साहू की हत्या से फैला खौफ
एक ठंडी रात विश्राम साहू अपने घर के बाहर अलाव ताप रहे थे, तभी अचानक गोली चली और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया। गांव के बुजुर्गों और परिवारों में ऐसा डर बैठ गया कि सूर्यास्त के बाद लोग बाहर निकलने से कतराने लगे। दरवाजे बंद कर लोग खुद को सुरक्षित रखने की कोशिश करने लगे।
चक्की में मिला खौफनाक मंजर
एक और दिल दहला देने वाली घटना में गांव के जगदीश की चक्की के अंदर उनका शव मिला। सिर का पिछला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त था और चारों ओर खून फैला हुआ था। यह दृश्य इतना भयावह था कि देखने वालों की रूह कांप गई। परिवार के लोग सदमे में आ गए और गांव में दहशत और गहरा गई।
इलाके में सालों तक छाया रहा डर का साया
लगातार हो रही इन हत्याओं ने पूरे क्षेत्र को डर के साये में जीने पर मजबूर कर दिया। लोग रात होते ही खुद को घरों में बंद कर लेते थे और किसी भी अनजान आवाज से सहम जाते थे। सदाशिव साहू का नाम ही खौफ का पर्याय बन चुका था। यह मामला लंबे समय तक इलाके में चर्चा का विषय बना रहा और लोगों की यादों में आज भी इसकी दहशत जिंदा है।