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गोवा वेकेशन में बदला अंदाज़: ममता कुलकर्णी फिर पुराने लुक में नजर आईं

ममता कुलकर्णी इन दिनों एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका बदला हुआ अंदाज़ है। साल 2025 के महाकुंभ में साध्वी रूप में नजर आईं ममता अब गोवा में दोस्तों के साथ छुट्टियां मनाती दिख रही हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में उनका लुक पूरी तरह बदला हुआ है। भगवा वस्त्र, चंदन-टीका और आध्यात्मिक छवि की जगह अब वह अपने पुराने ग्लैमरस अवतार में दिखाई दे रही हैं। इस अचानक बदलाव ने फैंस को हैरान कर दिया है और लोग उनके इस नए-पुराने रूप पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

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सोशल मीडिया पर ममता के वीडियो से मचा हंगामा

गोवा ट्रिप के दौरान ममता ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कई वीडियो और तस्वीरें साझा की हैं। इन क्लिप्स में वह दोस्तों के साथ मस्ती करती, वीडियो शूट करती और रिलैक्स मूड में नजर आ रही हैं। उनके इस अंदाज़ को देखकर कुछ यूजर्स चौंक गए हैं। कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या उन्होंने अपना साध्वी रूप छोड़ दिया है, तो कुछ ने उन्हें ‘नकली साध्वी’ तक कह दिया। हालांकि, कुछ फैंस ने उनके गले में दिख रहे रुद्राक्ष का जिक्र करते हुए कहा कि आध्यात्मिकता पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है, बल्कि यह उनका व्यक्तिगत संतुलन हो सकता है।

महाकुंभ में साध्वी अवतार ने खींचा था ध्यान

महाकुंभ 2025 के दौरान ममता कुलकर्णी ने अपने आध्यात्मिक रूप से सभी को चौंका दिया था। वह गेरुआ वस्त्रों में, फूल-मालाओं से सजी हुई और धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होती नजर आई थीं। इतना ही नहीं, उनका दूध से अभिषेक भी किया गया था और उन्हें ‘श्री यमाई ममता नंदगिरी’ नाम से संबोधित किया जाने लगा। इस दौरान उन्होंने खुद को पूरी तरह आध्यात्मिक जीवन में समर्पित बताया था, जिससे उनके फैंस और आम लोग काफी प्रभावित हुए थे।

23 साल की तपस्या और गुरु से दीक्षा का दावा

ममता कुलकर्णी ने अपने आध्यात्मिक सफर को लेकर बताया था कि यह कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं है। उनके अनुसार, उन्होंने साल 2000 से तपस्या शुरू की थी और करीब 23 वर्षों तक साधना की है। उन्होंने अपने गुरु से दीक्षा लेने की बात भी कही, जिनका आश्रम महाराष्ट्र के कुपोली क्षेत्र में बताया जाता है। ममता का कहना था कि इस दौरान उन्हें कई कठिन परीक्षाओं से गुजरना पड़ा और हर कसौटी पर खरा उतरने के बाद ही उन्हें धार्मिक उपाधियां प्राप्त हुईं।

महामंडलेश्वर बनने और ‘मध्यम मार्ग’ की सोच

ममता ने यह भी स्पष्ट किया था कि आध्यात्मिक जीवन अपनाने का मतलब यह नहीं कि वह पूरी तरह भौतिक जीवन से दूर हो जाएं। उन्होंने बताया कि जिस अखाड़े से वह जुड़ी हैं, वहां व्यक्ति को संतुलित जीवन जीने की स्वतंत्रता मिलती है। यानी कोई भी व्यक्ति आध्यात्मिकता और सामान्य जीवन के बीच संतुलन बना सकता है। ममता खुद को ‘मध्यम मार्ग’ अपनाने वाली मानती हैं, जहां वह साधना के साथ-साथ सामान्य जीवन की गतिविधियों को भी जारी रख सकती हैं। यही वजह हो सकती है कि आज वह दोनों रूपों में नजर आ रही हैं।

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