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केजरीवाल को कोर्ट से राहत, कांग्रेस क्यों हुई असहज? फैसले के बाद सियासत में नई खींचतान


दिल्ली शराब नीति मामले में अदालत द्वारा Arvind Kejriwal समेत सभी आरोपियों को बरी किए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। जहां कई विपक्षी दलों ने फैसले का स्वागत किया, वहीं Indian National Congress ने इस पर सवाल उठाए। सवाल यह है कि आखिर इस राहत से कांग्रेस की राजनीतिक चिंता क्यों बढ़ गई?


🧾 जिस मामले को कांग्रेस ने उठाया, उसी में बदल गई राजनीतिक स्थिति

दिल्ली की 2021 आबकारी नीति विवाद को सबसे पहले दिल्ली कांग्रेस नेताओं ने ही उठाया था और जांच की मांग की थी।
अब अदालत से राहत मिलने के बाद कांग्रेस के सामने राजनीतिक असहजता की स्थिति बन गई है, क्योंकि लंबे समय तक वह इस मुद्दे को भ्रष्टाचार के उदाहरण के रूप में पेश करती रही थी।

यदि कांग्रेस फैसले को स्वीकार करती है तो उसका पुराना आरोप कमजोर पड़ता है, और विरोध जारी रखती है तो राजनीतिक विरोधाभास सामने आता है।


🤝 गिरफ्तारी के समय बदला था कांग्रेस का रुख

जब Arvind Kejriwal विपक्षी गठबंधन राजनीति में शामिल हुए और उनकी गिरफ्तारी हुई, तब कांग्रेस नेतृत्व—जिसमें Sonia Gandhi और Rahul Gandhi शामिल थे—ने कार्रवाई का विरोध किया था।
कांग्रेस ने उस समय जांच का समर्थन लेकिन एजेंसियों के दुरुपयोग का विरोध करने की लाइन अपनाई।

यह “बीच का रास्ता” अब कांग्रेस के लिए राजनीतिक चुनौती बन गया है।


🗳️ AAP-कांग्रेस गठबंधन टूटा, बढ़ी सीधी राजनीतिक टक्कर

दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का तालमेल खत्म हो गया। इसके बाद राहुल गांधी ने खुलकर केजरीवाल सरकार पर शराब नीति और सरकारी खर्च को लेकर सवाल उठाए।

अब अदालत के फैसले ने AAP को राजनीतिक नैरेटिव बदलने का मौका दे दिया है, जिससे कांग्रेस की दिल्ली में वापसी की रणनीति प्रभावित हो सकती है।


📢 पवन खेड़ा का आरोप: ‘सुविधाजनक सहयोगी’

कांग्रेस मीडिया प्रभारी Pawan Khera ने आम आदमी पार्टी को बीजेपी का “सुविधाजनक सहयोगी” बताते हुए आरोप लगाया कि आगामी चुनावों से पहले AAP को राजनीतिक लाभ पहुंचाने की कोशिश हो रही है।

यह बयान संकेत देता है कि कांग्रेस अब AAP को विपक्षी सहयोगी नहीं बल्कि सीधे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में देख रही है।


🗺️ पंजाब और गुजरात चुनाव बना असली कारण?

आने वाले समय में पंजाब और गुजरात विधानसभा चुनाव होने हैं।

  • पंजाब में AAP सत्ता में है
  • कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है
  • गुजरात में भी AAP तेजी से कांग्रेस की पारंपरिक जमीन में सेंध लगा रही है

यदि अदालत के फैसले से Aam Aadmi Party को राजनीतिक सहानुभूति मिलती है, तो सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस को हो सकता है।


📈 केजरीवाल की वापसी से राहुल गांधी की चुनौती?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर Arvind Kejriwal की राजनीतिक पकड़ फिर मजबूत होती है तो विपक्ष के राष्ट्रीय चेहरे के रूप में Rahul Gandhi के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है।

वरिष्ठ नेता Mani Shankar Aiyar द्वारा विपक्षी नेतृत्व को लेकर उठाए गए सवाल भी इसी बहस को हवा दे चुके हैं।


🤔 कांग्रेस के भीतर भी मतभेद

दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस के अंदर इस फैसले पर एक राय नहीं है।
Manish Tewari और Margaret Alva जैसे नेताओं ने अलग रुख अपनाते हुए केजरीवाल को बधाई दी और मामले को राजनीतिक बताया।

यह दर्शाता है कि कांग्रेस के भीतर AAP को लेकर रणनीतिक स्पष्टता अभी पूरी तरह तय नहीं है।


🔎 क्या आगे फिर बन सकती है विपक्षी एकजुटता?

भारतीय राजनीति में स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होते। चुनावी परिस्थितियों के अनुसार वही कांग्रेस, जो अभी सवाल उठा रही है, भविष्य में विपक्षी एकता के नाम पर फिर सहयोग का रास्ता भी तलाश सकती है।

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