#देश दुनिया #बिजनेस #राज्य-शहर

शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 700 अंक टूटा, ट्रंप टैरिफ बयान से निवेशकों में घबराहट


मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत तेज गिरावट के साथ हुई। वैश्विक व्यापार तनाव और अमेरिकी टैरिफ नीति को लेकर बढ़ी अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के नए टैरिफ संकेतों का असर सीधे भारतीय बाजार पर देखने को मिला।


📊 बाजार खुलते ही सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम

सुबह कारोबार शुरू होते ही बिकवाली हावी हो गई।

  • BSE Sensex करीब 738 अंक गिरकर 82,552 पर पहुंचा
  • Nifty 50 206 अंक टूटकर 25,506 पर ट्रेड करता दिखा

प्री-ओपनिंग से ही बाजार कमजोर संकेत दे रहा था और शुरुआती मिनटों में निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी।

कल की तेजी के बाद ग्लोबल संकेत कमजोर पड़ते ही बाजार में तेज करेक्शन देखने को मिला।


🌍 ट्रंप टैरिफ ने बिगाड़ा ग्लोबल सेंटिमेंट

गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका की नई ट्रेड पॉलिसी बनी।

डोनाल्ड ट्रंप ने 15% ग्लोबल टैरिफ फ्रेमवर्क का संकेत देते हुए उन देशों को चेतावनी दी जो ट्रेड समझौतों से पीछे हट रहे हैं। इस बयान के बाद वॉल स्ट्रीट में गिरावट आई और उसका असर एशियाई बाजारों सहित भारत पर भी पड़ा।

हालांकि अमेरिकी अदालत द्वारा कुछ पुराने टैरिफ अवैध बताए जाने के बाद नीति को लेकर भ्रम और बढ़ गया है।

नीतिगत अनिश्चितता निवेशकों को जोखिम से दूर करती है, जिससे उभरते बाजारों में तुरंत बिकवाली शुरू हो जाती है।


📉 मिडकैप और स्मॉलकैप भी दबाव में

गिरावट सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही।

  • Nifty Midcap 100: 0.55% गिरावट
  • Smallcap 100 Index: 0.67% गिरावट

जब व्यापक बाजार टूटता है तो यह संकेत देता है कि निवेशकों का भरोसा अल्पकालिक रूप से कमजोर हुआ है।


💻 IT सेक्टर सबसे बड़ा लूजर

आज के कारोबार में आईटी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव दिखा।

  • Nifty IT Index करीब 2.84% टूटा
  • अमेरिकी टेक शेयरों में कमजोरी का असर
  • AI बदलावों से बिजनेस मॉडल पर चिंता

रियल्टी और मीडिया सेक्टर भी लाल निशान में रहे, जबकि मेटल और ऑयल & गैस शेयरों ने थोड़ी मजबूती दिखाई।

भारतीय IT कंपनियों की आय का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से आता है, इसलिए अमेरिकी नीतियां सीधे असर डालती हैं।


🛢️ क्रूड ऑयल और जियोपॉलिटिक्स से बढ़ा दबाव

अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें सात महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं।

भारत तेल आयात पर निर्भर है, इसलिए तेल महंगा होना महंगाई और चालू खाते दोनों के लिए जोखिम माना जाता है।

ऊंचे तेल दाम + वैश्विक तनाव = बाजार में अस्थिरता।


💰 विदेशी और घरेलू निवेशकों का रुख

सोमवार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने करीब 3,484 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने लगभग 1,292 करोड़ रुपये की बिकवाली की।

अगर विदेशी निवेश जारी रहता है तो गिरावट सीमित रह सकती है, लेकिन ग्लोबल संकेत फिलहाल बाजार को दबाव में रख सकते हैं।


🔎 आगे बाजार की दिशा क्या?

विशेषज्ञों के मुताबिक जब तक अमेरिकी व्यापार नीति और वैश्विक आर्थिक संकेत स्पष्ट नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *