ईरान पर हमले को लेकर अमेरिका में मतभेद? ट्रंप बोले – जंग हुई तो जीत तय
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच नई राजनीतिक और सैन्य बहस छिड़ गई है। अमेरिकी मीडिया में दावा किया गया कि ईरान पर संभावित हमले को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सेना के शीर्ष अधिकारियों के बीच मतभेद उभर आए हैं। हालांकि ट्रंप ने इन रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए साफ कहा है कि अगर युद्ध हुआ तो अमेरिका आसानी से जीत हासिल करेगा।
🇺🇸 ट्रंप ने मीडिया रिपोर्ट्स को बताया गलत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह दावा पूरी तरह गलत है कि अमेरिकी सेना के वरिष्ठ अधिकारी ईरान के खिलाफ कार्रवाई के विरोध में हैं।
उन्होंने कहा कि सेना युद्ध नहीं चाहती, लेकिन यदि सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया जाता है तो अमेरिकी सेना पूरी ताकत से जीत सुनिश्चित करेगी।
🪖 सैन्य नेतृत्व की चेतावनी पर उठे सवाल
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने व्हाइट हाउस और पेंटागन में संभावित जोखिमों को लेकर चिंता जताई थी।
बताया गया कि ईरान पर हमला लंबे और जटिल युद्ध में बदल सकता है, जिससे अमेरिकी सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
⚠️ क्या लंबा युद्ध बन सकता है खतरा?
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने हथियारों की उपलब्धता, सीमित अंतरराष्ट्रीय समर्थन और क्षेत्रीय तनाव बढ़ने जैसे मुद्दों को गंभीर खतरा बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पूरे मध्य-पूर्व में व्यापक संघर्ष को जन्म दे सकती है।
🤝 कूटनीति बनाम सैन्य कार्रवाई की बहस
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जारेड कुशनर ने भी पहले कूटनीतिक रास्ता अपनाने की सलाह दी थी।
हालांकि ट्रंप ने कहा कि वह समझौते को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन बातचीत विफल होने पर कड़ा फैसला लेने से पीछे नहीं हटेंगे।
🚢 मिडिल ईस्ट में बढ़ी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी
तनाव के बीच अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा दी है। क्षेत्र में विमानवाहक पोत, युद्धपोत, फाइटर जेट और अतिरिक्त रक्षा संसाधन तैनात किए गए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह दबाव रणनीति का हिस्सा हो सकता है ताकि ईरान पर बातचीत के लिए दबाव बनाया जा सके।
🧭 क्या जंग की ओर बढ़ रहे हैं अमेरिका-ईरान? | विश्लेषण
वर्तमान स्थिति तीन संभावनाओं की ओर इशारा करती है:
- पहला, सैन्य दबाव के जरिए नया परमाणु समझौता कराने की कोशिश।
- दूसरा, सीमित सैन्य कार्रवाई के जरिए शक्ति प्रदर्शन।
- तीसरा, बातचीत विफल होने पर व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का जोखिम।
अमेरिका खुलकर युद्ध की तैयारी दिखा रहा है, लेकिन समानांतर रूप से बातचीत जारी रखना यह संकेत देता है कि वॉशिंगटन अभी पूर्ण युद्ध से बचना चाहता है।
🌍 आगे क्या?
दोनों देशों के बीच अगली वार्ता गुरुवार को प्रस्तावित बताई जा रही है। यह बैठक तय करेगी कि तनाव कम होगा या मध्य-पूर्व एक नए सैन्य संकट की ओर बढ़ेगा।