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परमाणु हथियारों पर अमेरिका-रूस-चीन की ‘सीक्रेट’ बातचीत शुरू, क्या नई वैश्विक डील में भारत को भी मिलेगा न्योता?


दुनिया की तीन सबसे बड़ी सैन्य ताकतें—अमेरिका, रूस और चीन—परमाणु हथियार नियंत्रण को लेकर जिनेवा में अहम बातचीत कर रही हैं। आखिरी परमाणु नियंत्रण समझौते New START के खत्म होने के बाद शुरू हुई यह कूटनीतिक पहल वैश्विक सुरक्षा संतुलन को बदल सकती है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या भविष्य की नई परमाणु डील में भारत जैसे परमाणु शक्तियों को भी शामिल किया जाएगा?


🟥 न्यू START खत्म, शुरू हुई नई परमाणु राजनीति

अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों की संख्या सीमित करने वाला आखिरी बड़ा समझौता New START 5 फरवरी को समाप्त हो गया।

इसके बाद अमेरिका ने जिनेवा में रूस और चीन के प्रतिनिधियों के साथ नई वार्ता शुरू की है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ये बैठकें पहले हुई बातचीत से ज्यादा गंभीर और विस्तृत हैं।

New START के खत्म होने से पहली बार दुनिया लगभग बिना किसी बड़े परमाणु नियंत्रण ढांचे के खड़ी दिखाई दे रही है।


🟥 क्यों जरूरी हो गई यह बैठक?

अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि पुराना समझौता अब नई वास्तविकताओं को नहीं संभाल पा रहा था। खासकर चीन के तेजी से बढ़ते परमाणु हथियार कार्यक्रम को इसमें शामिल नहीं किया गया था।

अब अमेरिका चाहता है कि नया समझौता त्रिपक्षीय (US-Russia-China) हो।

यह संकेत है कि वैश्विक शक्ति संतुलन अब दो ध्रुवीय नहीं बल्कि बहुध्रुवीय परमाणु व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।


🟥 चीन क्यों झिझक रहा है?

चीन ने सार्वजनिक रूप से तीन देशों की परमाणु वार्ता में शामिल होने को लेकर अनिच्छा जताई है।

चीनी प्रतिनिधि शेन जियान ने कहा कि चीन परमाणु हथियारों की दौड़ में शामिल नहीं होना चाहता और उसके हथियार अमेरिका व रूस से काफी कम हैं।

बीजिंग का रुख बताता है कि वह बराबरी के ढांचे में बातचीत से पहले अपनी रणनीतिक क्षमता बढ़ाना चाहता है।


🟥 अमेरिका की नई रणनीति क्या है?

अमेरिका बहुपक्षीय हथियार नियंत्रण वार्ता को आगे बढ़ाना चाहता है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार अगला कदम इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य देशों (P5) के सामने ले जाना हो सकता है।

P5 देश:

  • अमेरिका
  • रूस
  • चीन
  • ब्रिटेन
  • फ्रांस

अगर P5 मॉडल लागू हुआ तो परमाणु नियंत्रण की नई वैश्विक व्यवस्था बन सकती है।


🟥 क्या भारत को भी मिल सकता है निमंत्रण?

दुनिया में वर्तमान में 9 देशों के पास परमाणु हथियार हैं—अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन, भारत, पाकिस्तान, इजराइल और उत्तर कोरिया।

हालांकि अभी भारत को औपचारिक निमंत्रण की कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य की व्यापक परमाणु वार्ता में भारत जैसे जिम्मेदार परमाणु राष्ट्र की भूमिका बढ़ सकती है।

भारत की “नो फर्स्ट यूज” नीति और स्थिर परमाणु सिद्धांत उसे संभावित वैश्विक वार्ता का स्वाभाविक उम्मीदवार बना सकते हैं।


🟥 अमेरिका यूरोपीय सहयोग भी बढ़ा रहा

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने ब्रिटेन और फ्रांस के साथ भी कई दौर की बातचीत की है ताकि व्यापक परमाणु नियंत्रण ढांचा तैयार किया जा सके।

यह संकेत देता है कि पश्चिमी गठबंधन नई सामूहिक परमाणु रणनीति बना रहा है।


🟥 परमाणु हथियारों की नई दौड़ का खतरा

विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि नया समझौता नहीं हुआ तो दुनिया फिर से परमाणु हथियारों की प्रतिस्पर्धा के दौर में प्रवेश कर सकती है।

AI, हाइपरसोनिक मिसाइल और नई सैन्य तकनीकों ने परमाणु संतुलन को पहले से अधिक जटिल बना दिया है।


🟥 बड़ी तस्वीर: बदलती विश्व व्यवस्था

यह वार्ता केवल हथियार नियंत्रण नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन, अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा और भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था तय करने की कोशिश है।

नई डील बनी तो यह शीत युद्ध के बाद सबसे बड़ा परमाणु समझौता साबित हो सकता है।

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