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ईरान में फिर भड़का छात्र आंदोलन: खामेनेई सरकार के खिलाफ ‘औरत, जिंदगी, आजादी’ की गूंज, 3 यूनिवर्सिटीज में तीसरे दिन भी प्रदर्शन


ईरान में राजनीतिक असंतोष एक बार फिर सड़कों और विश्वविद्यालय परिसरों तक पहुंच गया है। राजधानी तेहरान सहित कई यूनिवर्सिटीज में छात्र—खासतौर पर छात्राएं—सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ खुलकर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह विरोध ऐसे समय में तेज हुआ है जब ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव और परमाणु समझौते को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है।


🟥 तीसरे दिन भी जारी छात्र विद्रोह

तेहरान में सोमवार को लगातार तीसरे दिन छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। रिपोर्ट्स के अनुसार कम से कम तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में छात्र जुटे और सरकार विरोधी नारे लगाए। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो बताते हैं कि आंदोलन धीरे-धीरे संगठित रूप लेता जा रहा है।

लगातार तीन दिनों तक प्रदर्शन जारी रहना संकेत देता है कि असंतोष केवल एक घटना तक सीमित नहीं बल्कि व्यापक राजनीतिक नाराज़गी का परिणाम है।


🟥 शरीफ यूनिवर्सिटी बना विरोध का केंद्र

शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में छात्र कैंटीन के बाहर एकत्र हुए। कई छात्रों ने चेहरे ढककर नारे लगाए और तालियां बजाकर विरोध जताया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने ईरान के पुराने शाही झंडे भी लहराए और निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के समर्थन में आवाज उठाई।

इस दौरान अर्धसैनिक संगठन बसिज के सदस्यों और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की की खबरें सामने आईं, हालांकि यूनिवर्सिटी गार्ड्स ने बीच-बचाव किया।

शाही प्रतीकों का इस्तेमाल बताता है कि आंदोलन केवल सामाजिक आज़ादी तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती देने की दिशा में भी बढ़ रहा है।


🟥 तेहरान यूनिवर्सिटी में शहीद छात्रों की याद, फिर उठा विरोध

तेहरान यूनिवर्सिटी में पहले हुए प्रदर्शनों में मारे गए छात्रों की याद में कार्यक्रम आयोजित किया गया, जो जल्द ही विरोध सभा में बदल गया। यहां छात्रों ने “औरत, जिंदगी, आजादी” के नारे लगाए और सुप्रीम लीडर को हटाने की मांग की।

रिपोर्ट्स के अनुसार झड़प के दौरान यूनिवर्सिटी सुरक्षा कर्मियों ने हस्तक्षेप नहीं किया।

स्मृति सभाओं का विरोध में बदलना दर्शाता है कि आंदोलन भावनात्मक और वैचारिक दोनों स्तरों पर गहराता जा रहा है।


🟥 अल-जहरा यूनिवर्सिटी में छात्राओं की अगुवाई

महिलाओं की यूनिवर्सिटी अल-जहरा में छात्राओं ने बढ़-चढ़कर प्रदर्शन किया। यहां महिलाओं की बड़ी भागीदारी ने आंदोलन को नया प्रतीकात्मक रूप दिया।

ईरान में पिछले आंदोलनों की तरह इस बार भी महिलाओं की भूमिका केंद्रीय बनती दिख रही है, जो सामाजिक स्वतंत्रता के मुद्दे को राजनीतिक संघर्ष से जोड़ रही है।


🟥 अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बढ़ी अंदरूनी चुनौती

छात्र प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर परमाणु समझौते के लिए दबाव बना रहे हैं और मिडिल ईस्ट में सैन्य उपस्थिति बढ़ाने की चेतावनी दे चुके हैं।

जिनेवा में होने वाली अगली वार्ता से पहले ट्रंप ने कहा कि समझौता नहीं हुआ तो “गंभीर परिणाम” हो सकते हैं। वहीं ईरान ने किसी भी हमले का कठोर जवाब देने की बात कही है।

बाहरी दबाव और आंतरिक असंतोष का संयोजन किसी भी सरकार के लिए सबसे कठिन स्थिति पैदा करता है।


🟥 क्या खामेनेई सरकार की पकड़ कमजोर पड़ रही है?

विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार हो रहे छात्र आंदोलन यह संकेत देते हैं कि कठोर कार्रवाई के बावजूद डर का असर कम होता जा रहा है। जनवरी में भी बड़े पैमाने पर विरोध हुए थे, जिन्हें सुरक्षा बलों ने सख्ती से दबाया था।

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार हालिया आंदोलनों और सरकारी कार्रवाई में हजारों लोगों की मौत का दावा किया गया है, हालांकि सरकारी आंकड़े इससे कम बताए गए हैं।

ईरान में युवा आबादी और शासन व्यवस्था के बीच बढ़ती वैचारिक दूरी भविष्य की राजनीति को प्रभावित कर सकती है।


🟥 व्यापक तस्वीर: ईरान किस मोड़ पर?

ईरान आज दोहरे दबाव से गुजर रहा है—एक ओर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और सैन्य तनाव, दूसरी ओर युवाओं और महिलाओं की बढ़ती आज़ादी की मांग। विश्वविद्यालयों से शुरू हुआ यह आंदोलन अगर समाज के अन्य वर्गों तक पहुंचता है, तो देश की राजनीति में बड़ा बदलाव संभव है।

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