अलवर में टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर्स व चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव रहे मुख्य अतिथि
अलवर में देशभर के टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर्स एवं चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आज शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव रहे, जबकि राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कार्यशाला में डीजी फॉरेस्ट सुशील अवस्थी, राजस्थान के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) पवन उपाध्याय सहित वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि टाइगर कंजर्वेशन से जुड़े पॉलिसी इश्यू पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एक ओर मैनेजमेंट से जुड़ी चुनौतियां हैं तो दूसरी ओर ऑपरेशनल इश्यू भी कम नहीं हैं। ऑपरेशनल स्तर पर कई प्रकार की व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, वहीं मैनेजमेंट के अंतर्गत केंद्र प्रायोजित योजनाएं, फॉरेस्ट अधिकारियों की सुविधाएं और फॉरेस्ट रेंजर से जुड़ी समस्याएं आती हैं, जिन्हें विभागीय नेतृत्व को प्रतिदिन सुलझाना होता है।
उन्होंने आगे कहा कि टाइगर क्षेत्रों की बढ़ती लोकप्रियता के कारण पर्यटकों का दबाव, मानव-वन्यजीव संघर्ष, टाइगर का बाहरी क्षेत्रों में निकलना और बढ़ती आबादी जैसी चुनौतियां भी सामने आती हैं। इसके साथ ही ऑल इंडिया टाइगर एस्टिमेशन, टाइगर रेस्क्यू, रिहैबिलिटेशन जैसे वैज्ञानिक प्रयासों पर भी इस सेमिनार में ठोस निष्कर्ष निकलने चाहिए। साथ ही यह भी समीक्षा हो कि किन नीतियों पर अब तक काम नहीं हो पाया और जिन पर काम किया गया, उनके क्या परिणाम रहे। उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे अधिक बाघ संरक्षण भारत ने किया है और अब 21वीं सदी की जरूरतों के अनुसार नीतियां बनाई जानी चाहिए।
इस अवसर पर राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि वर्ष 2004 में अलवर का सरिस्का टाइगर रिजर्व बाघ विहीन हो गया था, लेकिन आज सरिस्का में लगभग 50 बाघ-बाघिन मौजूद हैं। यह राज्य और देश के लिए गर्व की बात है और सफल संरक्षण प्रयासों का प्रमाण भी है।