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Sovereign Gold Bond: बजट में बदले टैक्स नियम, निवेशकों को झटका

भारतीय निवेशकों के बीच लोकप्रिय सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond) स्कीम में बजट 2026 के बाद बड़ा बदलाव हुआ है. सरकार ने SGB पर मिलने वाली टैक्स छूट को लेकर नियम सख्त कर दिए हैं, जिससे खासतौर पर सेकेंडरी मार्केट से निवेश करने वालों को झटका लगा है.


🟢 बजट 2026 में SGB पर चली टैक्स की कैंची

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड से जुड़ी टैक्स छूट को सीमित करने का ऐलान किया. अब हर SGB निवेशक को कैपिटल गेन टैक्स से छूट नहीं मिलेगी, बल्कि यह राहत कुछ शर्तों के साथ ही उपलब्ध होगी.


🟢 क्या SGB पर टैक्स छूट पूरी तरह खत्म हो गई?

निवेशकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब SGB टैक्स-फ्री नहीं रहा. जवाब है—नहीं. टैक्स छूट खत्म नहीं हुई है, लेकिन अब यह केवल उन्हीं निवेशकों को मिलेगी जो सरकार द्वारा तय शर्तों को पूरा करेंगे.


🟢 पहले क्या था टैक्स छूट का नियम?

पहले अगर कोई निवेशक सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को 8 साल की मैच्योरिटी तक होल्ड करता था, तो उस पर होने वाले कैपिटल गेन पर कोई टैक्स नहीं लगता था. यह लाभ RBI से सीधे बॉन्ड खरीदने वालों के साथ-साथ सेकेंडरी मार्केट से खरीदने वालों को भी मिल रहा था.


🟢 बजट 2026 के बाद क्या बदला?

अब कैपिटल गेन टैक्स से छूट तभी मिलेगी जब:

  • बॉन्ड RBI के प्राइमरी इश्यू के दौरान खरीदा गया हो
  • निवेशक ने उसे इश्यू डेट से मैच्योरिटी तक होल्ड किया हो

यदि आपने SGB को NSE या BSE जैसे सेकेंडरी मार्केट से खरीदा है, तो मैच्योरिटी पर मुनाफे पर टैक्स देना होगा.


🟢 10 लाख के मुनाफे पर कैसे लगेगा 1.25 लाख टैक्स

मान लीजिए RBI से खरीदे गए बॉन्ड पर आपको 10 लाख रुपये का मुनाफा हुआ—इस पर टैक्स शून्य रहेगा.
लेकिन वही बॉन्ड अगर सेकेंडरी मार्केट से खरीदा गया है, तो 10 लाख के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 12.5% यानी 1.25 लाख रुपये टैक्स देना होगा.


🟢 किन निवेशकों के लिए नियम नहीं बदले?

जो निवेशक शुरुआत से ही RBI के जरिए SGB खरीदते हैं और उसे मैच्योरिटी तक रखते हैं, उनके लिए कोई बदलाव नहीं है. उनका कैपिटल गेन पहले की तरह टैक्स-फ्री रहेगा. हालांकि, 2.5% सालाना ब्याज पर पहले की तरह इनकम टैक्स लगता रहेगा.


🟢 सरकार ने क्यों बदला नियम? |

जानकारों के मुताबिक सरकार चाहती है कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को ट्रेडिंग इंस्ट्रूमेंट की बजाय लॉन्ग-टर्म सेविंग स्कीम के तौर पर इस्तेमाल किया जाए. यही वजह है कि सेकेंडरी मार्केट से टैक्स-फ्री मुनाफे का रास्ता बंद किया गया है.


🟢 निवेशकों के लिए साफ संदेश

अगर आप टैक्स-फ्री रिटर्न चाहते हैं, तो SGB सीधे RBI से खरीदें और मैच्योरिटी तक रखें.
लेकिन अगर आप सेकेंडरी मार्केट से सस्ते बॉन्ड खरीदकर टैक्स बचाने की रणनीति बना रहे थे, तो अब आपको रिटर्न कैलकुलेशन में टैक्स को जरूर शामिल करना होगा.

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