पनियाला से बड़ौदामेव तक नया सुपर एक्सप्रेस-वेजयपुर-दिल्ली कॉरिडोर को मिलेगा हाई-स्पीड बूस्ट….
बहरोड़/कोटपूतली।
जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर पनियाला से बड़ौदामेव तक विकसित किया जा रहा 86 किलोमीटर लंबा सुपर एक्सप्रेस-वे अब निर्माण के निर्णायक चरण में पहुंच गया है। जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामलों के निपटारे के बाद परियोजना का काम तेज कर दिया गया है और अब तक लगभग 29 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। यह सड़क परियोजना क्षेत्रीय यातायात के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों की दिशा भी बदलने वाली मानी जा रही है।
कोटपूतली-बहरोड़ से अलवर तक सफर होगा आसान
यात्रा समय में बड़ी कटौती
इस नए एक्सप्रेस-वे के चालू होने से कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा और अलवर जैसे प्रमुख इलाकों को सीधी और तेज सड़क कनेक्टिविटी मिलेगी। फिलहाल कोटपूतली से अलवर पहुंचने में जहां औसतन डेढ़ घंटे तक का समय लगता है, वहीं हाई-स्पीड कॉरिडोर बनने के बाद यह दूरी करीब 45 मिनट में पूरी की जा सकेगी। इससे दैनिक यात्रियों और माल परिवहन दोनों को राहत मिलेगी।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से सीधा जुड़ाव
उत्तर और पश्चिम भारत के बीच नया मार्ग
यह सुपर एक्सप्रेस-वे सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे नेटवर्क से जुड़ेगा। इसके जरिए पंजाब और हिमाचल प्रदेश से आने वाला यातायात पनियाला होते हुए सीधे दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर पर प्रवेश कर सकेगा। इससे उत्तर भारत से पश्चिमी राज्यों की ओर जाने वाले वाहनों के लिए एक वैकल्पिक और तेज मार्ग उपलब्ध होगा।
दो हिस्सों में विकसित हो रहा प्रोजेक्ट
कुल 40 अंडरपास होंगे शामिल
परियोजना को दो चरणों में आगे बढ़ाया जा रहा है—
पहला चरण: पनियाला से मातोर तक लगभग 40 किलोमीटर, जिसमें 17 अंडरपास बनाए जा रहे हैं।
दूसरा चरण: मातोर से बड़ौदामेव तक करीब 46 किलोमीटर, जहां 23 अंडरपास प्रस्तावित हैं।
इन अंडरपासों से स्थानीय आबादी, पशुओं और वन्यजीवों की आवाजाही सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
पहले चरण में कई गांवों को सीधा फायदा
पनियाला से मातोर के बीच बनने वाले हिस्से से पनियाला, बींजाहेड़ा, नांगललाखा, बटेरी, बबेरी, माजरा अहीर और काली पहाड़ी सहित आसपास के गांवों को बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की मुख्य मार्गों तक पहुंच सुगम होगी।
पनियाला में बनेगा बड़ा रोड जंक्शन
भविष्य की योजनाओं से बढ़ेगी उपयोगिता
पनियाला क्षेत्र में यह एक्सप्रेस-वे अंबाला ग्रीनफील्ड हाईवे और जयपुर-दिल्ली नेशनल हाईवे से जुड़कर एक महत्वपूर्ण मल्टी-लेन जंक्शन के रूप में विकसित किया जाएगा। आने वाले समय में नीमकाथाना बायपास के इससे जुड़ने की योजना भी है, जिससे इस मार्ग की रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाएगी।
उद्योग और रोजगार को मिलेगा नया आधार
एक्सप्रेस-वे के निर्माण से क्षेत्र में उद्योग, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर के विस्तार की संभावनाएं बढ़ेंगी। सड़क के आसपास औद्योगिक इकाइयों और व्यवसायिक गतिविधियों के पनपने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है। साथ ही दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में यातायात का दबाव भी कुछ हद तक कम होगा।
तीन जिलों के 55 गांव होंगे जिनका जुड़ाव इस हाईवे से होगा , तीन जिलों के कुल 55 गांवों को इसका लाभ मिलेगा ,इसमें कोटपूतली क्षेत्र के 2 गांव ,बानसूर के 15 गांव ,मुण्डावर के 9 गांव, किशनगढ़बास के 2 गांव, अलवर के 16 गांव, रामगढ़ के 9 गांव और लक्ष्मणगढ़ के 2 गांव है ।
उत्तर से पश्चिम तक नया आर्थिक गलियारा
यह सुपर एक्सप्रेस-वे केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर भारत और पश्चिमी भारत को जोड़ने वाला नया आर्थिक गलियारा साबित होगा। इसके जरिए कोटपूतली-बहरोड़ सहित आसपास के इलाके औद्योगिक और निवेश के नए केंद्र के रूप में उभर सकते हैं।
इस हाईवे की कुल लंबाई: 86 किलोमीटर है , इस 6 लेन का सुपर एक्सप्रेस-वे में 40अंडरपास रहेंगे इसके लिए 1748 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की गई है , इसकी चौड़ाई 100 मीटर है , इसमें 3 इंटरचेंज रहेंगे और 2 फ्लाईओवर होंगे ,