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ट्रंप को अपनी ही टीम पर भरोसा नहीं? वेनेजुएला मिशन से जेडी वेंस और स्पाई चीफ को बाहर रखने का दावा


क्या अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सबसे करीबी नेताओं को अंधेरे में रखकर वेनेजुएला में बड़ा सैन्य ऑपरेशन चलाया? अमेरिकी मीडिया की एक रिपोर्ट के बाद यह सवाल तेज हो गया है। दावा किया गया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गबार्ड को वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ कथित मिशन की योजना से जानबूझकर दूर रखा गया। हालांकि, जेडी वेंस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।


🔹 क्या वाकई टीम को बिना बताए भेजी गई सेना?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने महीनों तक वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने से जुड़े एक गुप्त ऑपरेशन की योजना बनाई। हैरानी की बात यह बताई गई कि इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी न तो उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को दी गई और न ही अमेरिका की शीर्ष खुफिया अधिकारी तुलसी गबार्ड को। इसी वजह से सवाल उठे कि क्या राष्ट्रपति ने जानबूझकर अपनी ही टीम को बाहर रखा।


🔹 मीडिया दावा: कोर टीम से हटाए गए वेंस और गबार्ड

वॉल स्ट्रीट जर्नल और ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट्स में कहा गया कि इजरायल-ईरान के 12 दिनों के युद्ध के बाद से ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बड़े फैसलों में वेंस और गबार्ड को “कोर टीम” से अलग कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, व्हाइट हाउस में अहम बैठकों में दोनों को बुलाया ही नहीं जा रहा था।


🔹 तुलसी गबार्ड पर अविश्वास?

रिपोर्ट का यह भी दावा है कि ट्रंप को भरोसा नहीं था कि तुलसी गबार्ड वेनेजुएला मिशन का समर्थन करेंगी। पहले भी वह ऐसे अभियानों को लेकर संदेह जता चुकी थीं और खुलकर समर्थन नहीं कर रही थीं। इसी कारण उन्हें महत्वपूर्ण बैठकों से दूर रखा गया। यहां तक कि व्हाइट हाउस के कुछ कर्मचारियों ने मजाक में कहा कि DNI का मतलब अब “डू नॉट इनवाइट” हो गया है।


🔹 ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्यूशन’ और विवाद

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को “ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्यूशन” नाम दिया गया था। दावा किया गया कि इस ऑपरेशन से जुड़ी कोई भी जानकारी तुलसी गबार्ड को नहीं दी गई थी। यहां तक कहा गया कि जब मिशन अपने सबसे निर्णायक चरण में था, तब गबार्ड हवाई के समुद्र तट पर अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर रही थीं।


🔹 जेडी वेंस का खंडन: “ये पूरी तरह गलत है”

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि वह वेनेजुएला से जुड़े ट्रंप प्रशासन के काम में “बहुत शामिल” हैं और नियमित रूप से व्हाइट हाउस की उच्चस्तरीय बैठकों की अध्यक्षता करते हैं।
वेंस ने कहा, “यह कहना कि मुझे या तुलसी गबार्ड को वेनेजुएला ऑपरेशन की योजना से बाहर रखा गया था—यह पूरी तरह गलत है।”


🔹 “कम लोगों को पता था, गोपनीयता जरूरी थी”

व्हाइट हाउस प्रेस कॉन्फ्रेंस में वेंस ने साफ किया कि ऑपरेशन की योजना सरकार के भीतर बहुत सीमित लोगों के साथ बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि इसे लंबे समय तक गुप्त रखा गया और केवल वरिष्ठ कैबिनेट स्तर के अधिकारियों तक ही इसकी जानकारी सीमित थी। वेंस ने इसे प्रशासन की रणनीतिक सफलता बताते हुए कहा, “मुझे इस गोपनीयता पर गर्व है।”


🔹 गोपनीयता या अंदरूनी अविश्वास?

इस पूरे विवाद ने ट्रंप प्रशासन के भीतर विश्वास और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक पक्ष इसे सुरक्षा कारणों से सीमित जानकारी रखने की रणनीति बता रहा है, तो दूसरा पक्ष इसे शीर्ष नेतृत्व के बीच बढ़ते अविश्वास का संकेत मान रहा है। यदि मीडिया के दावे सही हैं, तो यह दिखाता है कि ट्रंप राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में बेहद सीमित दायरे में ही फैसले लेना पसंद कर रहे हैं।


🔹 व्हाइट हाउस में बढ़ती खामोशी

वेनेजुएला ऑपरेशन को लेकर उठे सवाल केवल एक सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह ट्रंप प्रशासन की कार्यशैली पर भी रोशनी डालते हैं। क्या यह सख्त गोपनीयता की नीति है या फिर टीम के भीतर भरोसे की कमी—यह आने वाले दिनों में और साफ होगा। फिलहाल इतना तय है कि इस मिशन ने अमेरिकी राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।

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