🎬 9 साल के मासूम बच्चे से दूरी बनाकर रखती थीं शबाना आजमी, जुगल हंसराज ने किया बड़ा खुलासा
✍️ नई दिल्ली
फिल्म ‘मासूम’ में चाइल्ड एक्टर के तौर पर नजर आए जुगल हंसराज ने हाल ही में शबाना आजमी को लेकर एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान शबाना आजमी उनसे जानबूझकर दूरी बनाए रखती थीं, ताकि स्क्रीन पर उनके रिश्ते में अजीबपन और भावनात्मक दूरी स्वाभाविक लगे।
🎭 मेथड एक्टिंग के लिए सेट पर बना ली थी खास रणनीति
पिंकविला को दिए इंटरव्यू में जुगल हंसराज ने कहा कि शबाना आजमी सिर्फ मेथड एक्ट्रेस नहीं, बल्कि उससे भी कहीं आगे थीं।
उन्होंने बताया कि शबाना उनसे कम बातचीत करती थीं और सेट पर अक्सर दूर रहती थीं। उस वक्त उन्हें इसका कारण समझ नहीं आया, लेकिन बाद में पता चला कि यह सब किरदार की सच्चाई को बनाए रखने के लिए किया गया था।
👩👦 ऑनस्क्रीन रिश्ते को असली दिखाने की कोशिश
जुगल के मुताबिक, शबाना आजमी फिल्म में उनकी सौतेली मां का किरदार निभा रही थीं और वह नहीं चाहती थीं कि ऑफ-स्क्रीन अपनापन ऑन-स्क्रीन रिश्ते को कमजोर कर दे।
इसी वजह से वह उस बच्ची के ज्यादा करीब रहती थीं, जो फिल्म में उनकी सगी बेटी का रोल निभा रही थी। इसका असर फिल्म में साफ नजर आया और दर्शकों को दोनों के बीच की दूरी महसूस हुई।
🌟 जुगल हंसराज ने की शबाना आजमी की जमकर तारीफ
अपने अनुभव को याद करते हुए जुगल हंसराज ने कहा कि शबाना आजमी ने अपना किरदार बेहद खूबसूरती और संवेदनशीलता के साथ निभाया।
उनके अनुसार, यह तरीका पूरी तरह सफल रहा और फिल्म के इमोशनल सीन आज भी दर्शकों के दिल को छूते हैं।
🎞️ सौतेली मां और बेटे के रिश्ते की संवेदनशील कहानी थी ‘मासूम’
साल 1983 में रिलीज हुई ‘मासूम’ का निर्देशन शेखर कपूर ने किया था। यह फिल्म परिवार, रिश्तों और भावनाओं पर आधारित थी।
फिल्म का गाना ‘तुझसे नाराज नहीं जिंदगी’ आज भी क्लासिक माना जाता है।
👥 शानदार स्टारकास्ट ने बनाया फिल्म को यादगार
‘मासूम’ में जुगल हंसराज के अलावा नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी, उर्मिला मातोंडकर, सुप्रिया पाठक, सईद जाफरी, तुनजा और सतीश कौशिक जैसे दिग्गज कलाकार नजर आए थे।
यह फिल्म आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे संवेदनशील और यादगार फिल्मों में गिनी जाती है।
🔍क्यों खास है यह खुलासा?
जुगल हंसराज का यह अनुभव बताता है कि शबाना आजमी अपने किरदारों को कितनी गंभीरता से निभाती हैं। बच्चों के साथ काम करते समय भी उन्होंने अभिनय की सच्चाई से कोई समझौता नहीं किया, और यही वजह है कि ‘मासूम’ आज भी दर्शकों को भावुक कर देती है।