केरल में वाम किले में सेंध: तिरुवनंतपुरम में 30 साल बाद भाजपा को मिला मेयर पद…..
केरल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। दशकों से वाम दलों के मजबूत गढ़ माने जाने वाले तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी ने इतिहास रचते हुए पहली बार मेयर पद पर कब्जा कर लिया है। यह जीत न सिर्फ नगर निकाय चुनाव का परिणाम है, बल्कि केरल में बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी मानी जा रही है।
30 साल पुराना वाम किला हुआ ध्वस्त
तिरुवनंतपुरम नगर निगम में कांग्रेस के नेतृत्व वाले एलडीएफ का करीब 45 साल पुराना प्रभुत्व इस चुनाव में समाप्त हो गया। भाजपा के पार्षद राजेश ने मेयर पद की शपथ लेकर पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाई। यह पहला मौका है जब भाजपा ने केरल के किसी बड़े नगर निगम में मेयर पद हासिल किया है।
कड़े मुकाबले में मिली जीत
मेयर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी राजेश को 51 वोट मिले, जबकि विपक्ष को 50 वोट पर संतोष करना पड़ा। निर्दलीय पार्षद के समर्थन ने भाजपा की जीत की राह आसान की। भाजपा ने कुल 101 वार्डों में से 50 वार्डों में जीत दर्ज कर नगर निगम में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
राज्य के नगर निगम चुनावों में भाजपा का बढ़ता प्रभाव
राज्यभर के निकाय चुनाव नतीजों पर नजर डालें तो एलडीएफ ने 6 नगर निगमों में से 4 पर जीत हासिल की, जबकि भाजपा और यूडीएफ को एक-एक नगर निगम मिला। हालांकि सीटों के लिहाज से भले भाजपा पीछे रही हो, लेकिन तिरुवनंतपुरम की जीत को राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
वोट शेयर में लगातार बढ़ोतरी
भाजपा के बढ़ते जनाधार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि
- 2021 विधानसभा चुनाव में पार्टी को 11.4% वोट मिले थे
- 2025 लोकसभा चुनाव में यह आंकड़ा बढ़कर 19.26% तक पहुंच गया
यह साफ संकेत है कि भाजपा धीरे-धीरे केरल में अपनी जड़ें मजबूत कर रही है।
‘विकसित केरल’ के नारे ने शहरी मतदाताओं को जोड़ा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने इस बार हिंदुत्व से अधिक ‘विकसित केरल’ के एजेंडे पर जोर दिया। शहरी मतदाताओं के बीच बुनियादी ढांचे, पारदर्शिता और विकास को लेकर दिया गया संदेश असरदार साबित हुआ।
संघ नेटवर्क बना भाजपा की ताकत
भाजपा की इस सफलता के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मजबूत सांगठनिक नेटवर्क भी अहम माना जा रहा है। केरल में आरएसएस की 5,000 से अधिक शाखाएं सक्रिय हैं, जिसने जमीनी स्तर पर पार्टी के लिए मजबूत आधार तैयार किया है।
विश्लेषण | केरल की राजनीति में नई शुरुआत
तिरुवनंतपुरम की यह जीत भले ही संख्यात्मक रूप से छोटी हो, लेकिन राजनीतिक संकेत बेहद बड़े हैं। यह दिखाता है कि भाजपा अब केरल में केवल हाशिए की पार्टी नहीं रही। आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में यह जीत राज्य की राजनीति की दिशा बदल सकती है।